logo
Select Language
Hindi
Bengali
Tamil
Telugu
Marathi
Gujarati
Kannada
Malayalam
Punjabi
Urdu
Oriya

निजी मॉल्स के युवाओं/यूतीयोकी 'खामोश सिसकियां': 12 घंटे लगातार खड़े रहकर ड्यूटी करने को मजबूर, जवानी में ही घेर रही हैं बुढ़ापे की बीमारियां

बिलासपुर | शहर के बड़े-बड़े चकाचौंध से भरे प्राइवेट मॉल्स और मार्ट्स की हकीकत बेहद दर्दनाक है। यहाँ काम करने वाले 20 से 25 वर्ष के युवा, जिनमें युवतियों की संख्या सर्वाधिक है, हर दिन अमानवीय कार्य स्थितियों का सामना कर रहे हैं। सुबह 9 बजे से रात को स्टोर बंद होने तक यानी तकरीबन 12 घंटे तक इन कर्मचारियों को लगातार खड़ा रखा जाता है। इन्हें बैठने के लिए एक कुर्सी तक मयस्सर नहीं है, जिसके कारण ये युवा भविष्य में गंभीर शारीरिक अपंगता की ओर बढ़ रहे हैं।
सामाजिक कार्यकर्ता मोहम्मद इलाही ने उठाई आवाज
इस गंभीर मानवीय मुद्दे को लेकर सरकंडा निवासी सामाजिक कार्यकर्ता मोहम्मद इलाही ने मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने कलेक्टर बिलासपुर को आवेदन सौंपकर निजी रिटेल सेक्टर में 'Right to Sit' (बैठने का अधिकार) लागू करने की मांग की है। आवेदन की प्रतियां मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री छत्तीसगढ़ को भी भेजी गई हैं। इलाही का कहना है कि ड्यूटी के दौरान भीड़ न होने पर भी इन युवाओं को बैठने नहीं दिया जाता, जो सीधे तौर पर मानवाधिकारों का उल्लंघन है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
चिकित्सा विशेषज्ञों और हड्डी रोग विशेषज्ञों (Orthopedics) के अनुसार, लगातार 10-12 घंटे खड़े रहने से रीढ़ की हड्डी में स्थायी विकृति आ सकती है। इसके अलावा पैरों की नसों का फूलना (Varicose Veins) और गंभीर न्यूरोलॉजिकल समस्याएं इन युवाओं को समय से पहले अपना शिकार बना रही हैं। डॉक्टरों का मानना है कि यदि इन्हें बीच-बीच में 5-10 मिनट बैठने का समय और स्टूल/कुर्सी उपलब्ध कराई जाए, तो इन खतरों को टाला जा सकता है।
मांग: छत्तीसगढ़ में भी लागू हो 'राइट टू सिट'
सामाजिक कार्यकर्ता मोहम्मद इलाही ने मांग की है कि:
D-Mart, Smart Bazaar, Apna Mart जैसे सभी निजी संस्थानों में कर्मचारियों के लिए बैठने की अनिवार्य व्यवस्था की जाए।
श्रम विभाग इन संस्थानों का औचक निरीक्षण करे।
केरल और तमिलनाडु की तर्ज पर छत्तीसगढ़ में भी कर्मचारियों के स्वास्थ्य हेतु कड़े नियम बनाए जाएं।
मोहम्मद इलाही यशजी

1
599 views

Comment