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ठाणे में फर्जी दवाइयों के नाम पर शराब तस्करी का भंडाफोड़, 1.65 करोड़ की विदेशी शराब जब्त, दो आरोपी गिरफ्तार

ठाणे: महाराष्ट्र राज्य उत्पाद शुल्क विभाग ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए फर्जी चालान के जरिए दवाइयों के नाम पर दूसरे राज्य से लाई जा रही भारतीय निर्मित विदेशी शराब की तस्करी का पर्दाफाश किया है। फ्लाइंग स्क्वाड नंबर 1, ठाणे-1 की इस छापेमारी में करीब 1 करोड़ 65 लाख रुपये मूल्य की शराब जब्त की गई है और दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। यह कार्रवाई राज्य में अवैध शराब के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत एक बड़ी सफलता मानी जा रही है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह पूरी कार्रवाई 5 मई 2026 को की गई, जब राज्य उत्पाद शुल्क विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में फ्लाइंग स्क्वाड को एक विश्वसनीय मुखबिर से सूचना मिली। सूचना में बताया गया था कि गोवा राज्य में निर्मित भारतीय विदेशी शराब को दवाइयों के नाम पर फर्जी चालान बनाकर महाराष्ट्र में तस्करी के जरिए लाया जा रहा है। इस सूचना को गंभीरता से लेते हुए विभाग ने तुरंत रणनीति तैयार की और निगरानी बढ़ा दी।
इस ऑपरेशन का नेतृत्व राज्य उत्पाद शुल्क विभाग के उच्च अधिकारियों के निर्देशन में किया गया, जिसमें आयुक्त डॉ. राजेश देशमुख, संयुक्त आयुक्त प्रसाद सर्वे, संभागीय उप आयुक्त प्रदीप पवार, अधीक्षक प्रवीण तांबे, उप अधीक्षक आनंद पवार और रत्नमाला गायकवाड़ का विशेष मार्गदर्शन शामिल रहा। उनके निर्देशों के अनुसार फ्लाइंग स्क्वाड नंबर 1 ने ठाणे क्षेत्र में गश्त और जांच तेज कर दी।
सूचना के आधार पर टीम ने आर.सी. पाटिल टोल नाका से माजिवाड़ा रोड तक विशेष निगरानी रखी। इसी दौरान शाम लगभग 6:35 बजे एक संदिग्ध कंटेनर वाहन दिखाई दिया, जिसका नंबर MP-09-GG-7930 था। यह वाहन Ashok Leyland कंपनी का छह पहिया कंटेनर था, जो सफेद चॉकलेट रंग का था। वाहन के हाव-भाव और गतिविधियों पर संदेह होने पर टीम ने उसे तुरंत रोक लिया।
जब वाहन की तलाशी ली गई तो उसमें बड़ी मात्रा में गत्ते के डिब्बे पाए गए। शुरुआत में इन डिब्बों को दवाइयों का बताया गया, लेकिन जब अधिकारियों ने उन्हें खोलकर देखा तो अंदर से शराब की बोतलें बरामद हुईं। जांच में पता चला कि ये सभी 180 मिलीलीटर की रॉयल ब्लू माल्ट व्हिस्की की सीलबंद बोतलें थीं, जो गोवा राज्य में निर्मित थीं।
तलाशी के दौरान कुल 1450 डिब्बे जब्त किए गए, जिनमें लगभग 12,528 बोतलें (बैरल) विदेशी शराब पाई गईं। यह शराब पूरी तरह से अवैध तरीके से लाई जा रही थी और इसके लिए फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया था। विभाग ने तुरंत इस मामले में अपराध पंजीकरण संख्या 102/2026 के तहत मामला दर्ज कर लिया।
इस कार्रवाई के दौरान न केवल शराब बल्कि पूरा वाहन भी जब्त कर लिया गया। जब्त किए गए माल और वाहन की कुल कीमत लगभग 1,65,11,500 रुपये आंकी गई है। यह जब्ती राज्य उत्पाद शुल्क विभाग की हाल के समय की बड़ी कार्रवाइयों में से एक मानी जा रही है।
मौके से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जिनकी पहचान परगत सिंह करतार सिंह (वाहन चालक) और अमृतबीर सिंह हरप्रीत सिंह के रूप में हुई है। प्रारंभिक पूछताछ में यह सामने आया है कि ये दोनों एक बड़े नेटवर्क का हिस्सा हो सकते हैं, जो लंबे समय से इस तरह की तस्करी में शामिल है। हालांकि, इस पूरे गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी है।
इस पूरे ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम देने में फ्लाइंग स्क्वाड नंबर 1 की टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इस टीम में इंस्पेक्टर एम.पी. धनशेट्टी, सब-इंस्पेक्टर एन.आर. महाले, सब-इंस्पेक्टर एस.आर. मिसल, सहायक सब-इंस्पेक्टर बी.जी. थोरात, जवान पी.एस. नागरे, पी.ए. महाजन, वी.के. पाटिल, महिला जवान एस.एस. यादव, पी.पी. पाटिल और एम.जी. शेख सहित अन्य कर्मचारियों ने सक्रिय योगदान दिया।
इस मामले की आगे की जांच इंस्पेक्टर महेश प्रकाश धनशेट्टी द्वारा की जा रही है, जो अधीक्षक प्रवीण तांबे के मार्गदर्शन में पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि यह सिर्फ एक खेप नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक संगठित गिरोह सक्रिय हो सकता है, जो राज्य में अवैध शराब की सप्लाई करता है।
राज्य उत्पाद शुल्क विभाग ने स्पष्ट किया है कि महाराष्ट्र में शराबबंदी और अवैध तस्करी के खिलाफ सख्त अभियान जारी रहेगा। विभाग के अधिकारियों ने कहा कि ऐसे मामलों में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि तस्कर नए-नए तरीके अपनाकर कानून से बचने की कोशिश करते हैं। दवाइयों के नाम पर फर्जी चालान बनाकर शराब की तस्करी करना एक गंभीर अपराध है, जो न केवल राजस्व को नुकसान पहुंचाता है बल्कि समाज के लिए भी खतरा बन सकता है।
स्थानीय लोगों और प्रशासन ने इस कार्रवाई की सराहना की है और उम्मीद जताई है कि आगे भी ऐसे ही सख्त कदम उठाए जाएंगे ताकि अवैध गतिविधियों पर पूरी तरह से रोक लगाई जा सके।
अंततः, यह कार्रवाई न केवल एक बड़ी सफलता है बल्कि यह एक चेतावनी भी है उन लोगों के लिए जो कानून को चुनौती देने की कोशिश करते हैं। राज्य उत्पाद शुल्क विभाग की सतर्कता और तत्परता ने एक बड़े अवैध कारोबार को उजागर किया है, जिससे राज्य में कानून व्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिलेगी।

रिपोर्ट: विवेक ब्रह्म देव मिश्रा

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