वृंदावन: रजनीश महाराज ने यजुर्वेद में कर्म और ब्रह्मचर्य का महत्व बताया
वृंदावन: धर्म नगरी वृंदावन के पानीघाट क्षेत्र स्थित श्री रास बिहारी आश्रम में निकुंजवासी संत रास बिहारी महाराज के निकुंज लीला प्रवेश के सप्तम वार्षिकोत्सव के अवसर पर चतुर्वेद व्याख्यान माला का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के तीसरे दिन रजनीश महाराज ने यजुर्वेद पर विशेष व्याख्यान दिया।
उन्होंने बताया कि यजुर्वेद कर्म प्रधान वेद है और मनुष्य के जीवन में किए जाने वाले हर कर्म को यज्ञ स्वरूप माना गया है। रजनीश महाराज ने कर्म के तीन प्रकार—क्रियमान, संचित और प्रारब्ध कर्म—का विस्तार से वर्णन करते हुए कहा कि व्यक्ति को अपने कर्म पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथ करने चाहिए। उन्होंने जीवन में पवित्रता, मधुर वाणी, शुद्ध आहार और गृहस्थ जीवन में मर्यादा के पालन पर भी विशेष जोर दिया। ब्रह्मचर्य के महत्व को बताते हुए उन्होंने कहा कि इसका पालन जीवन को सुखमय और आनंदमय बनाता है।