फर्जी मुकदमों से सच की आवाज दबाने की कोशिश, सत्ता की हनक के खिलाफ मुहिम*
*पत्रकारों पर शोषण-अत्याचार बर्दाश्त नहीं, हम सब एकजुट*
*फर्जी मुकदमों से सच की आवाज दबाने की कोशिश, सत्ता की हनक के खिलाफ मुहिम*
आए दिन पत्रकारों पर हो रहे शोषण, अत्याचार और फर्जी मुकदमे लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर सीधा हमला हैं। सच लिखने, दिखाने और सवाल पूछने पर पत्रकारों को निशाना बनाना यह साफ दर्शाता है कि सत्ता की हनक हावी है।
कभी भोजन विवाद की सच्चाई सामने लाने पर केस, तो कभी पीड़ित की आवाज उठाने पर दबाव। यह सिलसिला अब बर्दाश्त से बाहर है।
हमारा स्पष्ट संदेश है: अत्याचार के खिलाफ यह मुहिम रुकेगी नहीं। कलम की आजादी और सच की लड़ाई में हम सब साथ हैं। जो भी पत्रकार सच्चाई के लिए संघर्ष कर रहा है, हम उसके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं।
*लोकतंत्र में सवाल पूछना अपराध नहीं है।*
*पत्रकार एकता जिंदाबाद*