10 सर्कुलर रोड का संग्राम
राबड़ी देवी को 10 सर्कुलर रोड वाला सरकारी बंगला खाली करने का नोटिस एक साधारण आवासीय आदेश नहीं, बल्कि बिहार की सत्ता-संस्कृति, नियमों और प्रतीकों से जुड़ा बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुका है. यह विवाद इसलिए ज्यादा संवेदनशील है क्योंकि 10 सर्कुलर रोड लंबे समय से लालू-राबड़ी परिवार की राजनीतिक पहचान का हिस्सा रहा है.
भवन निर्माण विभाग ने राबड़ी देवी सहित कुछ नेताओं को केंद्रीय पूल का आवास खाली करने को कहा है, और 10 सर्कुलर रोड वाला बंगला भी उसी आदेश के दायरे में आया है. रिपोर्टों के मुताबिक राबड़ी देवी को पहले भी नोटिस दिया गया था, और इस बार फिर से उसे जल्द खाली करने की बात दोहराई गई है. सरकार की ओर से उन्हें 39 हार्डिंग रोड का नया आवास पहले ही आवंटित किया जा चुका है.
इस विवाद की जड़ सरकारी आवासों के आवंटन नियमों और अदालत के पुराने फैसलों से जुड़ी है. रिपोर्टों के अनुसार 2019 के पटना हाईकोर्ट फैसले के बाद पूर्व मुख्यमंत्रियों को मिलने वाली विशेष सुविधाओं और बंगला-आवंटन की व्यवस्था पर असर पड़ा. इसी वजह से सरकार का तर्क है कि पुराने पद-आधारित आवास को अब खाली कर नियम के मुताबिक नया आवास लेना चाहिए.
राजनीतिक तौर पर यह मुद्दा सीधे सम्मान बनाम नियम की बहस में बदल गया है. आरजेडी ने इसे अपमान और राजनीतिक दबाव बताया है, जबकि जेडीयू/सरकारी पक्ष इसे कानून का पालन कह रहा है. यही टकराव इस मामले को प्रशासनिक आदेश से उठाकर पूरे बिहार की सियासत के केंद्र में ले आया है.
10 सर्कुलर रोड सिर्फ एक घर नहीं, बल्कि लालू परिवार की राजनीतिक उपस्थिति का पुराना प्रतीक रहा है. परिवार वहां करीब दो दशक से रह रहा है, इसलिए उसका खाली होना केवल शिफ्टिंग नहीं, बल्कि एक युग के समाप्त होने जैसा संदेश भी दे सकता है. यही वजह है कि इस फैसले को समर्थक और विरोधी, दोनों अपने-अपने राजनीतिक नजरिये से पढ़ रहे हैं.
अगर निर्धारित समय में आवास खाली नहीं किया गया, तो मामला आगे सक्षम अधिकारी और नियमों के तहत कार्रवाई की दिशा में जा सकता है. दूसरी ओर, आरजेडी का रुख सख्त दिख रहा है और पार्टी ने खुलकर विरोध दर्ज कराया है. इसलिए आने वाले दिनों में यह विवाद कानूनी नोटिस से बढ़कर अदालत, बयानबाजी और सड़क-राजनीति तक भी जा सकता है.
सरकारी कागज़ पर यह एक आवासीय नोटिस है, लेकिन राजनीतिक जमीन पर यह सत्ता, सम्मान और नियंत्रण की लड़ाई बन चुका है. 10 सर्कुलर रोड का मामला अब केवल बंगले का नहीं रहा, बल्कि बिहार की राजनीति में संदेश देने वाली बड़ी कहानी बन गया है.