ग्वालियर : मृदा परीक्षण आधारित उर्वरक उपयोग पर जागरूकता अभियान
ग्वालियर : किसान कल्याण वर्ष के तहत जिले में किसानों को टिकाऊ, उन्नत और प्राकृतिक खेती के प्रति जागरूक करने के लिए विभिन्न गतिविधियां आयोजित की गई हैं। केंद्रीय आलू अनुसंधान क्षेत्रीय केंद्र ग्वालियर और राज्य शासन के किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग के सहयोग से ग्राम बिलौआ में मृदा परीक्षण आधारित उर्वरक उपयोग के लाभ विषय पर जागरूकता कार्यक्रम हुआ। इस दौरान प्रधान वैज्ञानिक डॉ. सुभाष कटारे ने संतुलित उर्वरक उपयोग, हरी खाद और फसल चक्र के महत्व पर विस्तार से जानकारी दी।
मुख्य तकनीकी अधिकारी डॉ. संजय कुमार शर्मा ने मिट्टी के नमूने लेने की विधि समझाई और आलू, टमाटर, बैंगन जैसी फसलों में लागत कम करने के उपाय बताए। डॉ. एस.के. गुप्ता ने हरी खाद जैसे ढैंचा और सनई के उपयोग पर जोर दिया। बी.टी.एम. श्री मलखान सिंह गहलोत ने प्राकृतिक खेती के फायदे साझा करते हुए जीवामृत, नीमास्त्र, बीजामृत, ब्रह्मास्त्र, दशपर्णी अर्क बनाने की विधि समझाई। उत्कृष्ट कृषक श्री प्राण सिंह माथुर ने संतुलित उर्वरक उपयोग की संकल्पना साझा की। कार्यक्रम में 61 किसान शामिल हुए, जिनमें 4 महिलाएं और 57 पुरुष किसान थे। अंत में वैज्ञानिकों ने हरी खाद और जैव उर्वरकों के उपयोग की अपील की।