झारखंड में प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर उठे सवाल अभिभावकों की बढ़ी परेशानी
झारखंड में प्राइवेट स्कूलों द्वारा हर साल री-एडमिशन फीस के नाम पर मोटी रकम वसूलने और नई किताबें खरीदने के लिए मजबूर करने का मुद्दा अब तेजी से तूल पकड़ता जा रहा है। इस गंभीर विषय को लेकर डुमरी के विधायक Tiger Jairam Mahato से मुलाकात कर विस्तार से चर्चा की गई, जिसमें अभिभावकों की समस्याओं को प्रमुखता से रखा गया।
क्या है पूरा मामला?
राज्य के कई प्राइवेट स्कूल:
हर साल री-एडमिशन के नाम पर अलग से फीस लेते हैं
पुरानी किताबें चलने योग्य होने के बावजूद नई किताब खरीदने के लिए बाध्य करते हैं
यूनिफॉर्म, कॉपी-किताब, अन्य मदों में भी अतिरिक्त खर्च बढ़ा देते हैं
इससे मध्यम वर्ग और गरीब परिवारों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, झारखंड में इस तरह की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं और कई जगह अभिभावकों ने इसका विरोध भी किया है।
सरकार और सिस्टम क्या कहता है?
Government of Jharkhand ने पहले भी साफ कहा है कि
री-एडमिशन फीस वसूलना गलत है और इस पर कार्रवाई होगी
जिला स्तर पर कमेटियां बनाई गई हैं जो स्कूल फीस की निगरानी करती हैं
नियम तोड़ने वाले स्कूलों पर 50,000 से 2.5 लाख तक जुर्माना और मान्यता रद्द तक की कार्रवाई हो सकती है
हाल ही में फीस वृद्धि को नियंत्रित करने के लिए कुछ जगहों पर 10% की सीमा भी तय की गई है और पारदर्शिता अनिवार्य की गई है
पर्यावरण पर भी असर
हर साल नई किताबें खरीदने की मजबूरी:
पुराने संसाधनों की बर्बादी
कागज की मांग बढ़ने से पेड़ों की कटाई
पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव
यह मुद्दा सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि पर्यावरणीय चिंता भी बनता जा रहा है।
विधायक से क्या उम्मीद?
विधायक Tiger Jairam Mahato से मुलाकात के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि:
यह मुद्दा विधानसभा में जोरदार तरीके से उठेगा
सरकार सख्त कानून या नियम लागू करेगी
अभिभावकों को राहत मिलेगी
बड़ा सवाल
क्या शिक्षा अब व्यवसाय बनती जा रही है?
क्या सरकार की सख्ती जमीन पर लागू हो पा रही है?
आपकी क्या राय है?
क्या प्राइवेट स्कूलों की फीस और किताबों पर सख्त नियम होना चाहिए?
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