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आजकल 'ग़रीबी' की परिभाषा बदल गई है, और हमारे मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी जी इसके सबसे बड़े ब्रांड एंबेसडर

आजकल 'ग़रीबी' की परिभाषा बदल गई है, और हमारे मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी जी इसके सबसे बड़े ब्रांड एंबेसडर बनकर उभरे हैं। एक तरफ वो खुद को "ग़रीब का बेटा" बताकर जनता का दिल जीतते हैं, वहीं दूसरी तरफ 2024 में जब निर्वाचन आयोग (Election Commission) को दिया गया उनका हलफनामा (Affidavit) सामने आता है, तो असली "तस्वीर" साफ़ होती है।
आँकड़ों वाली "ग़रीबी" पर एक नज़र:
कुल संपत्ति: लगभग 5.6 करोड़ से 5.8 करोड़ (इतनी संपत्ति में तो एक आम आदमी की सात पुश्तें ग़रीबी का 'ग' भूल जाएं!)
कारें: एक नहीं, दो नहीं, पूरे 3 लग्जरी वाहन! (शायद ग़रीबी में पैदल चलना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता होगा?)
ज़मीन-जायदाद: करोड़ों की अचल संपत्ति, जो समय के साथ 'ग़रीबी' की तरह ही बढ़ती जा रही है।
सोचने वाली बात है...
अगर 5-6 करोड़ रुपये और 3 गाड़ियों वाला व्यक्ति "ग़रीब" है, तो हरियाणा की वो जनता क्या है जो 15,000 की नौकरी के लिए दिन-रात एक कर रही है?

"सैनी जी, हमें भी ऐसी ही 'ग़रीबी' का आशीर्वाद दे दीजिए, जहाँ करोड़ों का बैंक बैलेंस हो और फिर भी हम 'ग़रीब' कहलाने का हुनर रखते हों।"

राजनीति में सादगी का चोला पहनना एक कला है, और सैनी जी इस कला के उस्ताद हैं! वैसे भी, राजनीति में करोड़ों का मालिक होना ही तो आजकल की 'नई ग़रीबी' है।

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