मनरेगा समाप्ति से ग्रामीण रोजगार संकट गहरा
भारत: महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) जो ग्रामीण गरीबों के लिए वैधानिक रोजगार का अधिकार प्रदान करता था, अब समाप्त कर दिया गया है। भाजपा सरकार ने इसे वीबी-ग्राम (जी) योजना से प्रतिस्थापित किया है, जिससे मजदूरों की आजीविका पर अनिश्चितताएं बढ़ गई हैं। मनरेगा में वर्षवार मजदूरी संशोधन और मांग आधारित काम की गारंटी थी, जो नई योजना में नहीं है। इसके अलावा बजट आवंटन में कमी और राज्यों के लिए अनिश्चितता के कारण योजना के क्रियान्वयन में बाधाएं आ रही हैं।
देश के कई राज्यों में मनरेगा के तहत अधूरे कार्य और लंबित मजदूरी भुगतान की स्थिति बनी हुई है। दिल्ली के लिबटेक इंडिया के अनुसार, आंध्र प्रदेश में मनरेगा कार्य दिवसों में 23 प्रतिशत की गिरावट आई है, और पूरे देश में 2025-26 में रोजगार सृजन में 20 प्रतिशत से अधिक की कमी दर्ज की गई है। खेत मजदूर संगठन और नरेगा संघर्ष मोर्चा ने 15 मई को वीबी-ग्राम (जी) कानून वापस लेने और मनरेगा को मजबूत करने के लिए देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है। लेखक विक्रम सिंह अखिल भारतीय खेत मजदूर यूनियन के संयुक्त सचिव हैं।