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शिक्षा के बाद अब समाज सेवा की ओर कदम: जिले में दूसरा स्थान पाने वाली करिश्मा देवी लड़ेंगी ग्राम प्रधानी का चुनाव

सरीला(हमीरपुर)।अपनी मेहनत और लगन से उत्तर प्रदेश माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद की परीक्षा में जिले में दूसरा स्थान हासिल करने वाली हरसुण्डी गांव की बहु करिश्मा देवी अब एक नई पारी की शुरुआत करने जा रही हैं। शिक्षा के क्षेत्र में परचम लहराने के बाद, अब करिश्मा देवी और उनके पति सुनील राजपूत ने ग्रामीण राजनीति के माध्यम से समाज सेवा का संकल्प लिया है।
जिलाधिकारी ने किया सम्मानित हाल ही में सरीला तहसील में आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस के दौरान जिलाधिकारी अभिषेक गोयल ने करिश्मा देवी को उनकी मेधा के लिए प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। शादी और बच्चों की जिम्मेदारी निभाते हुए संस्कृत बोर्ड में जिले में दूसरा स्थान पाना क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। अधिकारियों ने उनके इस जज्बे को क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बताया है।गाँव की सूरत बदलने का संकल्प सफलता से उत्साहित करिश्मा देवी और उनके पति ने आने वाले समय में ग्राम प्रधानी का चुनाव लड़ने का मन बनाया है। उनका मानना है कि शिक्षा केवल व्यक्तिगत विकास के लिए नहीं, बल्कि समाज की भलाई के लिए होनी चाहिए। करिश्मा का कहना है, "जिस तरह संघर्ष कर मैंने शिक्षा प्राप्त की, अब मैं चाहती हूँ कि मेरे गाँव की अन्य बेटियों और महिलाओं को भी आगे बढ़ने के बेहतर अवसर मिलें। हम मिलकर गाँव को आदर्श गाँव बनाएंगे।"शिक्षा और विकास बनेगा मुख्य मुद्दा करिश्मा के पति सुनील राजपूत ने भी इस निर्णय का समर्थन करते हुए कहा कि गाँव के विकास के लिए एक शिक्षित और विजनरी नेतृत्व की जरूरत है। उनकी प्राथमिकता गाँव में बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएँ और सरकारी योजनाओं को पारदर्शिता के साथ लागू करना होगी।करिश्मा देवी की इस घोषणा के बाद गांव हरसुण्डी के ग्रामीणों में भी उत्साह का माहौल है। लोगों का मानना है कि यदि एक शिक्षित महिला गाँव की कमान संभालती है, तो निश्चित रूप से गाँव की तस्वीर बदलेगी।

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