सुप्रीम कोर्ट का ममता बनर्जी को झटका: चुनाव आयोग का कर्मियों की नियुक्ति पर विशेषाधिकार बरकरार
सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस को एक बड़ा झटका देते हुए स्पष्ट किया है कि चुनाव के दौरान मतगणना कर्मियों की नियुक्ति भारतीय चुनाव आयोग का विशेषाधिकार है। यह मामला मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की मतगणना के लिए केवल केंद्र सरकार और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के कर्मचारियों को काउंटिंग सुपरवाइजर के रूप में तैनात करने के चुनाव आयोग के फैसले से जुड़ा था। टीएमसी ने इस निर्णय को पारदर्शिता की कमी और निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए पहले कलकत्ता उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी, लेकिन वहां से याचिका खारिज होने के बाद पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।
न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति जयमाल्या बागची की विशेष पीठ ने इस पर सुनवाई करते हुए किसी भी तरह का हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया और कहा कि चुनाव आयोग का सर्कुलर नियमों के विरुद्ध नहीं है। अदालत ने चुनाव आयोग के उस आश्वासन को रिकॉर्ड पर लिया जिसमें आयोग ने अपने 13 अप्रैल के सर्कुलर को पूरी तरह लागू करने की बात कही थी, जिसके तहत मतगणना प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए राज्य और केंद्र दोनों के कर्मचारियों का समन्वय सुनिश्चित किया जाता है।
हालांकि, कोर्ट ने यह भी साफ किया कि चुनाव आयोग कर्मियों के चयन के लिए किसी एक विशेष पूल (जैसे केवल केंद्र सरकार के कर्मचारी) का चुनाव कर सकता है और इसमें कुछ भी अवैध नहीं है। ममता बनर्जी ने इससे पहले मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) प्रक्रिया को लेकर भी सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसमें उन्होंने चुनाव आयोग पर लाखों मतदाताओं के नाम हटाने का आरोप लगाया था।