लुधियाना का ‘बुद्धा दरिया’ बना जहर की धारा, कभी पीने योग्य था पानी
लुधियाना, पंजाब:
शहर के बीचों-बीच बहने वाला बुद्धा दरिया आज अपनी बदहाली की दर्दनाक कहानी खुद बयां कर रहा है। कभी यह दरिया इतना साफ और निर्मल हुआ करता था कि आसपास के लोग इसका पानी पीने के लिए अपने घरों में भरकर ले जाते थे, वहीं बच्चे और बड़े इसमें नहाया करते थे। लेकिन आज हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि यह दरिया एक गंदे नाले में तब्दील हो चुका है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, समय के साथ इस दरिया में शहर का पूरा सीवरेज और औद्योगिक कचरा मिलाया जाने लगा। लुधियाना की फैक्ट्रियों से निकलने वाला जहरीला पानी बिना किसी उचित ट्रीटमेंट के सीधे इसमें डाला जा रहा है। नतीजा यह हुआ कि जो जलधारा कभी जीवन का स्रोत थी, वह अब बीमारी और प्रदूषण का केंद्र बन गई है।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि यही दूषित पानी आगे जाकर सतलुज नदी में मिल जाता है और फिर सीमाएं पार कर पाकिस्तान तक पहुंचता है। इस तरह यह समस्या केवल स्थानीय नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पर्यावरण के लिए खतरा बन चुकी है।
सरकार द्वारा कई बार इस दरिया की सफाई के लिए योजनाएं बनाई गईं, बजट स्वीकृत हुए, लेकिन हर बार ये प्रयास कागजों तक ही सीमित रह गए। जमीनी स्तर पर सुधार न के बराबर देखने को मिला। प्रशासनिक लापरवाही और सिस्टम की विफलता ने इस संकट को और गहरा कर दिया है।
यह स्थिति केवल सरकार की ही नहीं, बल्कि समाज की भी जिम्मेदारी को उजागर करती है। इंसान की बढ़ती स्वार्थपरता और लापरवाही ने प्राकृतिक जल संसाधनों को बर्बादी की कगार पर पहुंचा दिया है।
आज जरूरत है कि बुद्धा दरिया को फिर से उसकी पुरानी पहचान दिलाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। उद्योगों पर सख्त नियंत्रण, सीवरेज ट्रीटमेंट की प्रभावी व्यवस्था और जनजागरूकता ही इस दरिया को पुनर्जीवित कर सकती है।
यह केवल एक दरिया की कहानी नहीं, बल्कि हमारी सोच और व्यवस्था पर एक कड़ा सवाल है — क्या हम प्रकृति को बचाने के लिए तैयार हैं, या इसे यूं ही मरते हुए देखते रहेंगे?