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: रिश्वतखोरों की अब खैर नहीं: "समस्तीपुर में निगरानी विभाग का बड़ा 'ब्लास्ट', 1 लाख रुपए घूस लेते रंगे हाथों गिरफ्तार"



विजय कुमार,वरिष्ठ पत्रकार
30अप्रैल 2026
​पटना/समस्तीपुर: बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' की नीति पर चलते हुए निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने एक बार फिर बड़ी कामयाबी हासिल की है।
साल 2026 की अपनी 50वीं बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए ब्यूरो ने समस्तीपुर जिले के रोसड़ा अनुमंडलीय अस्पताल में तैनात एक लिपिक (क्लर्क) को भारी भरकम रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों दबोच लिया है।

​मामला क्या है?
गिरफ्तार आरोपी की पहचान अनिल राम के रूप में हुई है। आरोप है कि उन्होंने एक शिकायतकर्ता, देवेंद्र मंडल से उनके बकाया वेतन (लगभग 37 लाख रुपये) के भुगतान और पेंशन संबंधी कार्यों को क्लीयर करने के बदले मोटी रकम की मांग की थी।
भ्रष्टाचार की इस जड़ को काटने के लिए निगरानी विभाग ने जाल बिछाया और 30 अप्रैल, 2026 को अनुमंडल चौक के पास से अनिल राम को 1,00,000 (एक लाख रुपये) नकद लेते हुए गिरफ्तार कर लिया।

​भ्रष्टाचार पर सीधा प्रहार:
यह गिरफ्तारी केवल एक व्यक्ति की गिरफ्तारी नहीं है,
बल्कि उन सरकारी मुलाजिमों के लिए एक सख्त संदेश है जो आम जनता की मेहनत की कमाई को अपनी जेब भरने का जरिया समझते हैं।

निगरानी ब्यूरो की टीम ने सत्यापन के बाद त्वरित कार्रवाई करते हुए इस 'धावादल' (Raid Team) का गठन किया, जिसका नेतृत्व पुलिस उपाध्यक्ष संजय कुमार ने किया।

​आगे की राह:
आरोपी को मुजफ्फरपुर स्थित विशेष निगरानी न्यायालय में पेश किया जा रहा है। इस कार्रवाई ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि यदि नागरिक जागरूक हों और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाएं, तो तंत्र की सफाई मुमकिन है।

​निष्कर्ष:
बिहार में सरकारी दफ्तरों को 'रिश्वतखोरी' से मुक्त करने का यह अभियान सराहनीय है। लिपिक अनिल राम की गिरफ्तारी भ्रष्टाचार के खिलाफ जारी इस महायुद्ध में एक और महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।

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