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विश्वविद्यालय संस्कृत विभाग के मंडन मिश्र चेयर एवं डॉ प्रभात दास फाउंडेशन की ओर से 2 मई को होगा सेमिनार का आयोजन

विश्वविद्यालय संस्कृत विभाग के मंडन मिश्र चेयर एवं डॉ प्रभात दास फाउंडेशन की ओर से 2 मई को होगा सेमिनार का आयोजन

विकसित भारत के निर्माण में संस्कृत की भूमिका' विषयक संगोष्ठी में प्रो पुनीता झा-उद्घाटन कर्ता एवं प्रो जीवानन्द झा होंगे मुख्य अतिथि

विश्वविद्यालय संस्कृत विभाग में आयोजित नि:शुल्क सेमिनार में सभी सहभागियों को दिया जाएगा प्रमाण पत्र

ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के स्नातकोत्तर संस्कृत विभाग में संचालित मंडन मिश्र चेयर तथा डॉ प्रभात दास फाउंडेशन, दरभंगा के संयुक्त तत्त्वावधान में आगामी 2 मई को अपराह्ण 12:30 बजे से "विकसित भारत के निर्माण में संस्कृत की भूमिका" विषय पर ऑनलाइन एवं ऑफलाइन मोड में निःशुल्क सेमिनार का आयोजन पीजी संस्कृत विभाग के सभागार में किया जाएगा, जिसमें सभी सहभागियों को प्रमाण पत्र भी दिया जाएगा। सेमिनार की रूपरेखा तैयार करने के उद्देश्य से विभागाध्यक्ष डॉ कृष्णकान्त झा की अध्यक्षता में महत्त्वपूर्ण बैठक हुई, जिसमें मंडन मिश्र चेयर के समन्वयक डॉ आर एन चौरसिया, दर्शनशास्त्र के विभागाध्यक्ष डॉ शिवानन्द झा, संस्कृत-प्राध्यापिका डॉ ममता स्नेही, उदयनाचार्य पीठ की समन्वयक डॉ मोना शर्मा, संस्कृत अध्ययन केन्द्र के शिक्षक अमित कुमार झा, शोधार्थी- रितु कुमारी, कर्मचारी- मंजू अकेला, योगेन्द्र पासवान, उदय कुमार उदेश, छात्र- रजत रंजन, अभिषेक झा एवं अंजना कुमारी आदि उपस्थित थे।
विभागाध्यक्ष डॉ कृष्णकान्त झा ने कहा कि भारतीय ज्ञान-परंपरा अति प्राचीन एवं काफी समृद्ध है। यह वैज्ञानिक एवं प्रासंगिक भी है जो हमें आत्मज्ञान प्रदान करने में सक्षम है। इसका मूल स्रोत संस्कृत साहित्य है। इसका रहस्योद्घाटन सेमिनार में विद्वानों द्वारा किया जाएगा। उन्होंने बताया कि मानविकी संकायाध्यक्ष प्रो पुनीता झा इस सेमिनार का उद्घाटन करेंगी, जबकि सी एम बी कॉलेज, घोघरडीहा, मधुबनी के प्रधानाचार्य एवं पीजी संस्कृत के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो जीवानन्द झा मुख्य अतिथि होंगे। सेमिनार के संयोजक डॉ आर एन चौरसिया ने बताया कि यूं तो विकसित भारत के निर्माण में हरेक व्यक्ति, हर क्षेत्र, प्रत्येक कला एवं साहित्य आदि सभी का योगदान है, परंतु इनमें संस्कृत साहित्य की भूमिका सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण है। यह हमें मानवीय मूल्यों से युक्त कर आदर्श मानव बनाने में सक्षम है। इसका अध्ययन कर हम न केवल मानवता की रक्षा कर सकते हैं, बल्कि विकसित भारत का निर्माण भी कर सकते हैं तथा इससे हमारा भारतवर्ष पुनः विश्वगुरु भी बन सकता है। धन्यवाद ज्ञापन करते हुए डॉ ममता स्नेही ने कहा कि चूंकि यह एक शोध विश्वविद्यालय है, अतः यहां शोध-कार्य, पुस्तकों एवं शोध पत्रिकाओं के प्रकाशन के साथ ही नियमित रूप से संगोष्ठी, व्याख्यान एवं कार्यशाला आदि का आयोजन किया जा रहा है। यह संगोष्ठी इसी दिशा में एक सार्थक प्रयास है। किसी भी विषय के शिक्षक, शोधार्थी एवं विद्यार्थी अधिक से अधिक संख्या में भाग लेकर संगोष्ठी से लाभ उठा सकते हैं।

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