धुरंधर के क्लाइमैक्स में मेजर इक़बाल हमज़ा का मुँह चेन से बाँधने के बाद कहता है कि हिन्दुस्तान के हर मर्द का खतना कर देगा।
धुरंधर के क्लाइमैक्स में मेजर इक़बाल हमज़ा का मुँह चेन से बाँधने के बाद कहता है कि हिन्दुस्तान के हर मर्द का खतना कर देगा।
उसको सड़क पे भीख मँगवाएगा, उससे कलमा पढ़वायेगा। औरतों को मुरीदके बाज़ार में तोल के भाव बेचेगा।
ये सारे ओवर हार्श डाइलॉग्स आप सुनो तो पता चलेगा कि ये डबिंग में अलग से डाले हुए हैं। लिप सिंक नहीं हो रहा है। मैं जब पहली शाम धुरंधर देखकर आया था तब हैरान था कि यार इतना बढ़िया डायरेक्टर राइटर, ऐसे सस्ते डाइलॉग्स क्यों लिख रहा है?
पर कल मीरा रोड की खबर मिली, यूएस से लौटा ज़ुबैर अंसारी दो सिक्युरिटी गार्ड्स को सिर्फ इसलिए चाकू मारने लगता है कि वो कलमा पढ़ना नहीं जानते। ठीक वैसे ही जैसे पहलगाम में हुआ था। कलमा नहीं सुनाओगे तो लो गोली। नासिक वाला पैटर्न थोड़ा अलग था, वहाँ गोली मारी नहीं खिलाई जा रही थी। मीठी गोली में ज़हर चटा दिया कि यहाँ प्रमोशन चाहिए तो कलमा पढ़ो, सुन्नत कराओ!
अब हम तो धुरंधर के द्वारा चौड़े में दिखा रहे हैं कि हमारे कितने असेट्स वहाँ हैं, राजा मंत्री चोर सिपाही सबमें भारतीय अजेंट्स घुसे हुए हैं।
लेकिन हमसे कहीं ज़्यादा उनके यहाँ भरे हुए हैं।
एक उपराष्ट्रपति ज़रूरी जानकारी लीक कर आता है। कोई मंत्री करेंसी प्लेट्स बाँट देता है। कोई जर्नलिस्ट पाक्सतां के कसीदे पढ़ते नहीं थकता, पूजा, मंदिर, कलावा, चढ़ावा आदि ढोंग है, ये दिमाग में डाला जाता है। बाबाओं के कांड मशहूर हों, मौलवियों की हरकतें छिपा ली जाएँ, हालाँकि अभी उल्टा हो गया है!
इसमें सिनेमा भी पीछे नहीं है, अभी भूत बँगला में अक्षय कुमार जब पेड़ की पूजा कर रहा है तो बेहूदे तरीके से मज़ाक उड़ाया जा रहा है, वहीं पंडित जी को दक्षिणा नहीं, बक्शीश देने की बात हो रही है, उसमें भी वह पंडित जी को अंधविश्वास फ़ैलाने के लिए 2 थप्पड़ मार देता है, बताइए, हॉरर फ़िल्म में वास्तु और महूरत को अंधविश्वास बताया जा रहा है।
ये नरेटिव वॉर तो गोली बंदूक की जंग से भी ज़्यादा खतरनाक है। प्रॉक्सी वॉर का सीन कुछ यूँ है कि हम कराची और सिंध बर्बाद करने पर तुले हैं तो वो बंगाल बर्बाद कर चुके हैं। महाराष्ट्र अभी प्रोसेस में है।
भारत अब जा के घर में घुस रहा है, मार रहा है। वो कबके घर में घुसे बैठे हैं, मुहल्ले के मुहल्ले बर्बाद कर चुके हैं।
हमारे जसकीरत को उधर जाने के लिए हमज़ा बनना पड़ता है, ट्रेनिंग लेनी पड़ती है, खतना करवाना पड़ता है पर उधर का ज़ुबैर तो ज़ुबैर बनकर ही आ सकता है क्योंकि देश अपना सेक्यलर धर्मशाला है।
वो यहाँ कलमा पढ़ाने की बात करते हैं, उनपर केस होता है, जेल में बिरयानी चलती है। हमारा एजेंट तो दूर की बात, पाक्सतां का कोई नॉर्मल सिख या हिन्दू उधर किसी मुस्लिम के खिलाफ़ भी कुछ बोल भी दे तो उसकी मॉबलिंच हो जाती है।
ये सब देख लगता है कि आदित्य धर ने कोई ग़लत डाइलॉग नहीं लिखे,
आईएसआई लगातार अपने मिशन में आगे बढ़ती जा रही है, हम भले लोग सिर्फ एलईटी और जेईएम के टॉप कमांडर्स को मारकर जश्न मना रहे हैं, वो हमारे आम लोगों को नुकसान पहुँचा, नस्ल की नस्ल खराब कर रहे हैं।
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