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देहरादून एकता विहार धरना स्थल आज ज्वालामुखि बन गया ✊✊✊✊✊

आज एकता विहार धरना स्थल सिर्फ एक मंच नहीं, बल्कि जनआक्रोश का ज्वालामुखी बन गया। पूर्व आईएएस, ब्रिगेडियर और पूर्व सैनिकों की गरज ने माहौल को ऐसा झकझोर दिया कि सत्ता के गलियारों तक उसकी गूंज साफ सुनाई दे रही है। उनकी आवाज में सिर्फ शब्द नहीं, बल्कि वर्षों की उपेक्षा, अन्याय और पहाड़ के दर्द की आग थी।
वक्ताओं ने साफ चेतावनी दी—अब और धोखा नहीं चलेगा। स्थाई राजधानी गैरसैण सिर्फ एक मांग नहीं, बल्कि पहाड़ के अस्तित्व, सम्मान और भविष्य की लड़ाई है। उन्होंने कहा कि जब तक राजधानी पहाड़ में नहीं होगी, तब तक विकास का सपना सिर्फ कागजों में ही दम तोड़ता रहेगा।
मंच से सरकार को सीधी चुनौती दी गई—या तो जनभावनाओं का सम्मान करो, या फिर आने वाले तूफान के लिए तैयार रहो। यह तूफान शांत नहीं होगा, बल्कि हर गांव, हर युवा और हर सैनिक की आवाज बनकर उठेगा।
आज की दहाड़ ने साफ कर दिया है—अब पहाड़ जाग चुका है, और जब पहाड़ जागता है, तो इतिहास बदलता है।

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