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बाबूलाल मरांडी ने पैतृक गांव कोदईबांक में बिताए सुकून के पल, प्रकृति को बताया ऊर्जा का स्रोत

झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने शुक्रवार को शहर की भागदौड़ भरी जिंदगी से दूर अपने पैतृक गांव कोदईबांक में दिन बिताया। इस दौरान उन्होंने ग्रामीण जीवन की सरलता, हरियाली और प्राकृतिक वातावरण के बीच सुकून के पल साझा किए।
​प्राकृतिक माहौल में मिला सुकून
​सोशल मीडिया पर अपने अनुभव साझा करते हुए बाबूलाल मरांडी ने बताया कि गांव की सादगी और स्वच्छ वातावरण ने उनका मन मोह लिया। उन्होंने लिखा कि खेतों की हरियाली और स्वच्छ हवा ने उनके मन और दिमाग को पूरी तरह से तरोताज़ा कर दिया।
​मेहनत से उगाई गई उपज का महत्व
​गांव के खेतों में उग रही ताज़ी सब्ज़ियों और फलों के बीच समय बिताते हुए उन्होंने प्रकृति और किसान की मेहनत के महत्व को भी महसूस किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि:
​"मेहनत से उगाए गए खाद्य पदार्थों का स्वाद और संतुष्टि ही अलग होती है, जो प्राकृतिक जीवन को और खास बनाती है।"
​जीवन में प्रकृति का महत्व
​पूर्व मुख्यमंत्री का यह अनुभव एक महत्वपूर्ण संदेश देता है कि आज की व्यस्त दिनचर्या में कभी-कभी प्रकृति के करीब जाना बेहद आवश्यक है। ग्रामीण जीवन की सरलता से मिलने वाली मानसिक शांति और नई ऊर्जा जीवन को संतुलित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

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