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*गर्मियों में तेज तपिश और लू से कैसे बचाव करें*

*बदनावर - धार ः AIMA (Social Media Raju Gajbhiye Activists/Journalist)*
*गर्मियों में तेज तपिश और लू से कैसे बचाव करें*

गर्मियों में तेज तपिश और लू (Heatwave) से बचने के लिए शरीर को हाइड्रेटेड रखना और खुद को सीधी धूप से बचाना सबसे जरूरी है। यहाँ कुछ आसान और असरदार उपाय दिए गए हैं: 

खान-पान और हाइड्रेशन (शरीर को अंदर से ठंडा रखें) 

· भरपूर पानी पिएं: प्यास न लगने पर भी थोड़ी-थोड़ी देर में पानी पीते रहें। दिन में कम से कम 8-10 गिलास पानी पिएं।

· तरल पदार्थों का सेवन: नारियल पानी, नींबू पानी, छाछ, लस्सी, आम पन्ना और ओआरएस (ORS) का घोल पीते रहें ताकि शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी न हो।

· ठंडे फल-सब्जियां: तरबूज, खरबूजा, खीरा, ककड़ी और संतरा जैसे फल खाएं, जिनमें पानी की मात्रा ज्यादा होती है।

· इनसे बचें: ज्यादा चाय, कॉफी, कैफीनयुक्त या मीठे पेय पदार्थ और शराब से बचें, क्योंकि ये शरीर को निर्जलित (Dehydrate) करते हैं। 


बाहर निकलते समय सावधानी

· दोपहर में न निकलें: सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे के बीच बाहर निकलने से बचें।

· कपड़ों का चयन: हल्के रंग के, ढीले-ढाले और सूती (Cotton) कपड़े पहनें ताकि हवा आसानी से शरीर  तक पहुंच सके।

· शरीर को ढकें: बाहर जाते समय छाता, टोपी या स्कार्फ का उपयोग करें।

· सनस्क्रीन का उपयोग: धूप में निकलने से पहले त्वचा पर सनस्क्रीन (SPF 30 या उससे अधिक)  लगाएं। 

घर को ठंडा रखने के उपाय -

· पर्दे और खिड़कियां: दिन के समय घर के खिड़की-दरवाजे और पर्दे बंद रखें ताकि गर्म हवा अंदर न  आए। शाम को इन्हें खोलकर हवा आने दें।

· कूलर/AC का उपयोग: कूलर या एयर कंडीशनर का उपयोग करें। यदि ये न हों तो घर में पंखा चलाकर  रखें।

· ठंडा स्नान: ठंडे पानी से नहाएं या गीले कपड़े से शरीर को पोंछें। 

· लू (Heat Stroke) के लक्षण और बचाव -

· लक्षण: यदि तेज सिरदर्द, चक्कर आना, जी मिचलाना, उल्टी, या कमजोरी महसूस हो, तो तुरंत  छायादार जगह पर जाएं और ठंडा पानी पिएं।

· सावधानी: एसी से निकलकर सीधे तेज धूप में न जाएं।

· गाड़ी में सावधानी: खड़ी गाड़ी में बच्चों या पालतू जानवरों को कभी अकेला न छोड़ें। 

· इन उपायों को अपनाकर आप तेज गर्मी के दिनों में भी स्वस्थ और सुरक्षित रह सकते हैं।

 मानव शरीर के लिए तेज तपिश सहन करने की क्षमता मुख्य रूप से आसपास के तापमान और नमी (humidity) पर निर्भर करती है। वैज्ञानिक शोध के अनुसार, मनुष्य की सहने की क्षमता के मुख्य बिंदु यहाँ दिए गए हैं: 

· अधिकतम सीमा (सैद्धांतिक): एक स्वस्थ इंसान 100% आर्द्रता (humidity) में अधिकतम 35°C (वेट-बल्ब तापमान) तक ही सुरक्षित रह सकता है। इस स्तर से ऊपर, शरीर खुद को ठंडा नहीं रख पाता और हीटस्ट्रोक से कुछ घंटों में मौत हो सकती है।

· सामान्य ऊपरी सीमा: सूखी गर्मी (low humidity) में मनुष्य 40°C से 50°C (104°F - 122°F) तक तापमान कुछ समय के लिए सहन कर सकता है, लेकिन यह लंबे समय के लिए सुरक्षित नहीं है।

· शरीर का आंतरिक तापमान: अगर शरीर का आंतरिक तापमान (core temperature) 43°C (109.4°F) तक पहुँच जाता है, तो अंगों के काम करना बंद करने की 99% संभावना होती है और मृत्यु निश्चित मानी जाती है। 

· 

नमी का असर (Wet-Bulb Temperature):
गर्मी के साथ जब हवा में नमी हो, तो शरीर को ठंडक महसूस नहीं होती। 35°C का वेट-बल्ब तापमान, सामान्य 45-50°C से भी ज्यादा खतरनाक होता है क्योंकि इसमें पसीना सूखता नहीं है और शरीर का तापमान तेजी से बढ़ता है। 

सावधानी: 40°C से अधिक तापमान पर हीट स्ट्रेस (heat stress) होने लगता है और लंबे समय तक रहने से मौत का खतरा बढ़ जाता है। 

तपती गर्मी में मिट्टी के घड़े (मटके) का पानी पीना स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है। यह फ्रिज के पानी का एक बेहतरीन और प्राकृतिक विकल्प है। 

मटके के पानी के मुख्य फायदे: 

· प्राकृतिक रूप से ठंडा: मटका पानी को प्राकृतिक तरीके से ठंडा रखता है, जो शरीर के लिए ज्यादा अनुकूल होता है।

· गले के लिए बेहतर: फ्रिज के बहुत ठंडे पानी से गले में खराश या खांसी-जुकाम हो सकता है, जबकि मटके का पानी गले पर नरम रहता है।

· पाचन में सुधार: मटके का पानी पीने से पाचन तंत्र सक्रिय होता है और भोजन आसानी से पचता है।

· डिटॉक्सिफिकेशन: यह शरीर में जमा अतिरिक्त गर्मी और विषैले तत्वों को बाहर निकालने में मदद करता है।

· ब्लड प्रेशर में मददगार: मटके का पानी ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने और शरीर से बैड कोलेस्ट्रॉल को कम करने में सहायता कर सकता है। 

 

 

 

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