अमेरिका-ईरान तनाव का पाकिस्तान पर असर: तेल बिल ढाई गुना बढ़ा, सरकार अलर्ट मोड में
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का सीधा असर अब पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर दिखने लगा है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने खुद स्वीकार किया है कि इस संघर्ष के कारण देश को भारी आर्थिक झटका लग रहा है।
सबसे बड़ा असर तेल आयात पर पड़ा है। पहले जहां पाकिस्तान का तेल आयात बिल करीब 30 करोड़ डॉलर था, वहीं अब यह बढ़कर 80 करोड़ डॉलर तक पहुंच गया है—यानी ढाई गुना से भी ज्यादा वृद्धि। इससे पहले से ही दबाव में चल रही अर्थव्यवस्था पर और बोझ बढ़ गया है।
स्थिति को संभालने के लिए पाकिस्तान सरकार ने एक विशेष टास्क फोर्स का गठन किया है, जो हालात की निगरानी कर रही है और संकट से निपटने की रणनीति बना रही है। साथ ही, सरकार पश्चिम एशिया में शांति बहाल करने के प्रयासों में सक्रिय भूमिका निभाने की बात भी कह रही है।
शहबाज शरीफ के अनुसार, इस्लामाबाद ने क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के लिए ईमानदारी से प्रयास किए हैं। 11 अप्रैल को इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच हुई बातचीत को पाकिस्तान एक बड़ी कूटनीतिक सफलता के रूप में देख रहा है। इस प्रक्रिया में आर्मी चीफ असीम मुनीर, उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों की अहम भूमिका रही।
प्रधानमंत्री ने यह भी दावा किया कि दोनों देशों के बीच युद्धविराम की दिशा में हुई प्रगति इन प्रयासों का नतीजा है। उन्होंने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के साथ हुई बैठक का भी जिक्र किया।
हालांकि, बातचीत को आगे बढ़ाने में अभी भी अड़चनें हैं। पाकिस्तान, अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दौर की वार्ता शुरू कराने की कोशिश कर रहा है, लेकिन अब तक सफलता नहीं मिल पाई है। ईरान के विदेश मंत्री अराघची ने पाकिस्तान का दौरा तो किया, लेकिन अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल से सीधे बातचीत करने से इनकार कर दिया।
इस घटनाक्रम के बाद अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने वार्ताकारों की इस्लामाबाद यात्रा रद्द कर दी और कहा कि ईरान सीधे वॉशिंगटन से संपर्क कर सकता है।
इसी बीच, रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान ने अमेरिका को बातचीत के लिए तीन चरणों वाला नया प्रस्ताव भेजा है। इसमें पहले युद्ध रोकने और होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने की बात कही गई है, जबकि परमाणु मुद्दे पर चर्चा बाद में करने का सुझाव दिया गया है।
कुल मिलाकर, यह पूरा घटनाक्रम न केवल क्षेत्रीय राजनीति को प्रभावित कर रहा है, बल्कि पाकिस्तान जैसी अर्थव्यवस्थाओं पर भी गहरा असर डाल रहा है।