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स्कूलों का महंगी कॉपी, किताबें और स्टेशनरी पर अपना लोगो/ब्रांड लगाकर बेचना बच्चों के परिवारों के साथ सीधी लूट

स्कूलों का महंगी कॉपी, किताबें और स्टेशनरी पर अपना लोगो/ब्रांड लगाकर बेचना बच्चों के परिवारों के साथ सीधी लूट जैसा है। यह आम बाज़ार की चीज़ों से 2-3 गुना ज़्यादा पैसे लेता है, जबकि लोगो लगाने के अलावा इसमें कुछ खास नहीं होता। ऐसा क्यों होता है? स्कूल ये चीज़ें खुद या अपनी टाई-अप दुकानों के ज़रिए बेचते हैं। वे “यूनिफ़ॉर्मिटी और बच्चे को स्कूल से जोड़ने” का बहाना बनाते हैं। असल में, यह एक तरह की मोनोपॉली है जिससे माता-पिता से ज़्यादा पैसे ऐंठते हैं। सरकार का क्या रुख है? पंजाब (भारत और पाकिस्तान दोनों में) और दूसरे राज्यों की सरकारों ने इसके ख़िलाफ़ गाइडलाइंस जारी की हैं: प्राइवेट स्कूल माता-पिता को किसी खास दुकान से खरीदने के लिए मजबूर न करें। स्कूल सिर्फ़ ज़रूरी चीज़ों की लिस्ट दे सकता है, लेकिन लोगो वाली चीज़ें खरीदना ज़रूरी नहीं कर सकता। कई जगहों पर इसे गैर-कानूनी माना गया है और इसके ख़िलाफ़ कार्रवाई भी हुई है। लेकिन असल में, कई स्कूल इसे नज़रअंदाज़ करते हैं और बच्चों पर लोगो वाली कॉपी लाने का दबाव डालते हैं। आप क्या कर सकते हैं? स्कूल प्रिंसिपल से लिखकर पूछें कि बिना लोगो वाली सादी कॉपी लाने पर कोई रोक है या नहीं, तो उसका रेफरेंस मांगें। अपने इलाके के डिस्ट्रिक्ट एजुकेशन ऑफिसर (DEO) या पंजाब स्कूल एजुकेशन डिपार्टमेंट में शिकायत करें। ज़्यादातर जगहों पर ऐसी शिकायतों पर एक्शन लिया गया है। दूसरे पेरेंट्स से बात करें। अगर हम सब मिलकर आवाज़ उठाएंगे, तो बदलाव आना आसान है। आम मार्केट से अच्छी क्वालिटी की कॉपी खरीदकर ले जाएं। अगर बच्चा डरता है, तो उसे समझाएं कि यह उसका हक है। यह प्रैक्टिस बंद होनी चाहिए क्योंकि पढ़ाई महंगी नहीं होनी चाहिए, खासकर मिडिल क्लास और गरीब परिवारों के लिए। पढ़ाई बच्चों के लिए होनी चाहिए, स्कूल अथॉरिटीज़ की जेब भरने के लिए नहीं। 🍳*हरबंस सिंह, एडवाइजर* 🙏🏻 शहीद भगत सिंह एसोसिएशन पंजाब +91-8054400953,

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