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बंदूक से कलम तक: पूर्व सैनिक नरेश दास वैष्णव निंबार्क की गौरवगाथा

बंदूक से कलम तक: राष्ट्र सेवा और साहित्य का अद्भुत संगम हैं नरेश दास वैष्णव निंबार्क
​[गन्नौर, हरियाणा | 29 अप्रैल, 2026]
​कहते हैं कि एक सैनिक कभी रिटायर नहीं होता, वह केवल अपनी भूमिका बदलता है। इस कथन को आज अक्षरशः चरितार्थ कर रहे हैं नरेश दास वैष्णव निंबार्क। भारतीय सेना में 24 वर्षों तक अदम्य साहस के साथ मां भारती की सेवा करने वाले पूर्व नायब सूबेदार नरेश दास आज अपनी लेखनी और सामाजिक कार्यों के माध्यम से समाज में नई चेतना का संचार कर रहे हैं।
​(आगे की पूरी बॉडी वही रहेगी जो मैंने पहले दी थी, बस स्थान और तारीख का यह फॉर्मेट अखबार के लिए सबसे उपयुक्त है।)
​नोट: चूँकि आप कल यानी 30 अप्रैल को अपनी मासिक ई-पत्रिका 'सनातन भारत – नया सवेरा' लॉन्च करने जा रहे हैं, तो अगर आप चाहें तो नीचे एक लाइन यह भी जोड़ सकते हैं:
​"इसी कड़ी में कल, 30 अप्रैल को उनकी नई वैचारिक मासिक ई-पत्रिका 'सनातन भारत – नया सवेरा' का भव्य शुभारंभ होने जा रहा है।"
वेबसाइट
www.nareshswaminimbark.in

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