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जिंदगी की जंग: MOU अटका, इलाज रुका — 11 वर्षीय लक्ष्मी मुंडा की मदद को उठी आवाज

जमशेदपुर (पूर्वी छोटागोविंदपुर)
झारखंड के जमशेदपुर से एक बेहद मार्मिक मामला सामने आया है, जहाँ 11 वर्षीय आदिवासी बच्ची लक्ष्मी मुंडा ‘एक्यूट ब्लड कैंसर’ जैसी गंभीर बीमारी से जिंदगी की जंग लड़ रही है। पहाड़ी क्षेत्र सनातनपुर गाँव की रहने वाली लक्ष्मी का इलाज सरकारी योजना के तहत होना था, लेकिन एक तकनीकी कारण ने उसकी उम्मीदों पर विराम लगा दिया है।

क्या है पूरा मामला?

लक्ष्मी मुंडा का इलाज राज्य की मुख्यमंत्री गंभीर बीमारी योजना के अंतर्गत होना था। इस योजना के जरिए गरीब और जरूरतमंद मरीजों को बड़े अस्पतालों में मुफ्त या सब्सिडी पर इलाज की सुविधा मिलती है।

लेकिन समस्या तब खड़ी हुई जब स्वास्थ्य विभाग और टाटा कैंसर अस्पताल के बीच हुआ MOU (समझौता) 17 मार्च 2026 को समाप्त हो गया।

इस वजह से लक्ष्मी का इलाज योजना के तहत नहीं हो पा रहा है, जिससे परिवार गहरे संकट में है।

परिवार की स्थिति

लक्ष्मी का परिवार आर्थिक रूप से बेहद कमजोर है। पहाड़ी क्षेत्र में रहने के कारण उनकी आय के साधन सीमित हैं। महंगे कैंसर इलाज का खर्च उठाना उनके लिए लगभग असंभव है।

परिजन सरकारी मदद की आस लगाए बैठे हैं, लेकिन MOU खत्म होने की वजह से प्रक्रिया अटक गई है।

सरकार से अपील

स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी और विधायक दीपिका पांडे सिंह से अपील की है कि वे इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करें।

मांग की जा रही है कि:

MOU को जल्द नवीनीकृत किया जाए

या विशेष अनुमति देकर लक्ष्मी का इलाज तत्काल शुरू कराया जाए

बड़ा सवाल

क्या एक मासूम की जिंदगी सिर्फ एक “तकनीकी बाधा” के कारण खतरे में पड़नी चाहिए?
यह मामला स्वास्थ्य व्यवस्था और सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
लोगों की प्रतिक्रिया

सोशल मीडिया पर यह मुद्दा तेजी से उठ रहा है। लोग सरकार से मानवीय आधार पर त्वरित निर्णय लेने की मांग कर रहे हैं
निष्कर्ष

लक्ष्मी मुंडा की कहानी सिर्फ एक बच्ची की नहीं, बल्कि उन हजारों गरीब परिवारों की हकीकत है जो सरकारी योजनाओं पर निर्भर हैं। ऐसे में जरूरी है कि सिस्टम की खामियों को दूर कर समय पर इलाज सुनिश्चित किया जाए।

अब देखना होगा कि प्रशासन इस अपील पर कितनी जल्दी कार्रवाई करता है और क्या लक्ष्मी को समय रहते जीवनदान मिल पाता है।

आपकी क्या राय है? क्या ऐसे मामलों में सरकार को तुरंत विशेष हस्तक्षेप करना चाहिए? कमेंट में जरूर बताएं।

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