बंगाल में चुनावी जंग का फाइनल राउंड: भारी सुरक्षा, हाई वोल्टेज मुकाबला और रिकॉर्ड वोटिंग की उम्मीद”
29 अप्रैल को पश्चिम बंगाल में दूसरे और अंतिम चरण के लिए मतदान हो रहा है, जिसे बेहद संवेदनशील माना जा रहा है। इसी वजह से सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतज़ाम किए गए हैं। BSF, CRPF समेत CAPF की 2400 से ज्यादा कंपनियाँ तैनात हैं, सड़कों पर 100 से अधिक बख्तरबंद गाड़ियाँ उतारी गई हैं, और NIA की टीमें भी निगरानी में लगी हैं। सुरक्षा व्यवस्था इतनी कड़ी है कि पहले जवानों की तैनाती की गई, उसके बाद ही चुनावी टीमें बूथों तक पहुँचीं।
इस चरण का सबसे बड़ा और हाई-प्रोफाइल मुकाबला भवानीपुर सीट पर है, जहाँ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और बीजेपी के शुभेंदु अधिकारी आमने-सामने हैं। पूरे राज्य की नजर इस सीट पर टिकी हुई है।
हालांकि प्रशासन अलर्ट मोड पर है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक पहले चरण के मुकाबले इस बार हिंसा और कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका ज्यादा जताई जा रही है।
अगर आंकड़ों की बात करें, तो इस चरण में 142 विधानसभा सीटों पर 1448 उम्मीदवार मैदान में हैं, जिनमें 1228 पुरुष और 220 महिला उम्मीदवार शामिल हैं। कुल मतदाताओं की संख्या 3 करोड़ 22 लाख 13 हजार 778 है। ट्रिब्यूनल के आदेश के बाद 1468 नए मतदाता जोड़े गए हैं, जबकि 6 नाम हटाए गए हैं। वहीं करीब 34 लाख मतदाताओं की अपील पर फैसला नहीं हो सका, जिससे वे इस बार वोट नहीं डाल पाएंगे।
चुनाव आयोग को इस चरण में 90% से ज्यादा वोटिंग की उम्मीद है। पिछले चरण में 93.19% का रिकॉर्ड मतदान हुआ था। खास बात यह है कि कई लोग दूसरे राज्यों से सिर्फ इसलिए वापस आए हैं क्योंकि उन्हें डर है कि अगर वोट नहीं दिया, तो उनका नाम वोटर लिस्ट से कट सकता है।
इस बार चुनाव में महिलाओं का जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है, वहीं युवा वोटर्स भी बड़ी संख्या में हिस्सा ले रहे हैं। 30 से 39 साल के वोटर्स की संख्या सबसे ज्यादा है, जो 73 लाख 56 हजार से ऊपर है।
कुल मिलाकर, बंगाल का यह फाइनल फेज सिर्फ एक चुनाव नहीं, बल्कि सियासी शक्ति का बड़ा इम्तिहान बन चुका है।