अब सेटेलाइट इमेज से होगा जमीनों का नाप
तहसील में वर्षों पुराने जमीन रिकॉर्ड को पूरी तरह अपडेट करने के लिए अब डी नोवो सर्वे (पुनः सर्वे) की शुरुआत की जा रही है। इस पहल के तहत आधुनिक तकनीक और सैटेलाइट इमेज की मदद से गांवों की कृषि भूमि का नए सिरे से सटीक मापन किया जाएगा।
इससे लंबे समय से चल रहे जमीन विवादों के समाधान और रिकॉर्ड में पारदर्शिता आने की उम्मीद है। अधिकारियों ने बताया कि इस बार पारंपरिक तरीकों के बजाए अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाएगा, जिससे प्रत्येक खेत की सही स्थिति और सीमाएं दर्ज की जा सकेंगी। मंगलवार को ग्राम पंचायत मिश्रौली में प्रशासक जगमाल सिंह चौहान की अध्यक्षता में ग्राम सभा आयोजित की गई, जिसमें ग्रामीणों को इस सर्वे की विस्तृत जानकारी दी गई।
इस सर्वे के तहत पचपहाड़ तहसील के कुल 155 गांवों को शामिल किया गया है। लगभग 71,213 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली कृषि भूमि का मापन किया जाएगा, जिसमें करीब 32,478 खातेदारों की जमीन शामिल होगी। अधिकारियों के अनुसार यह संख्या समय-समय पर बदल सकती है, लेकिन सर्वे का दायरा व्यापक रहेगा। डी नोवो सर्वे के अंतर्गत पूरी तहसील का नया डिजिटल नक्शा तैयार किया जाएगा। हर खेत और प्लॉट को एक यूनिक आईडी नंबर दिया जाएगा, जिससे उसकी अलग पहचान बनेगी। जमीन मालिक का नाम, क्षेत्रफल और लोकेशन डिजिटल रिकॉर्ड में दर्ज होगी। इससे नामांतरण, खरीद-बिक्री, बैंक ऋण और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाएं अधिक सरल और पारदर्शी हो जाएंगी।
पहले सैटेलाइट से प्राप्त ऑर्थो फोटो के आधार पर नक्शा तैयार किया जाएगा, फिर सर्वे टीम गांवों में जाकर मौके पर जमीन का सत्यापन करेगी। जहां जरूरत होगी वहां सीमांकन भी किया जाएगा, ताकि किसी प्रकार की त्रुटि न रह जाए। आधुनिक तकनीक के उपयोग से मापन पहले की तुलना में अधिक सटीक होगा। पुराने जमीन विवाद सुलझाने में मदद मिलेगी ^डी नोवो रिसर्वे पूरी तरह आधुनिक तकनीक पर आधारित है। सेटेलाइट इमेज और जीपीएस सिस्टम की मदद से जमीन की सटीक माप की जाएगी। हर खेत और प्लॉट का डिजिटल नक्शा तैयार कर उसे यूनिक आईडी दी जाएगी, जिससे भविष्य में रिकॉर्ड पारदर्शी और विवाद रहित रहेगा।
निर्धारित समय में सर्वे कार्य पूरा करने का प्रयास किया जाएगा। -सतीश शर्मा, जिला प्रभारी, सीकोन कंपनी इस सर्वे की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इससे पुराने जमीन विवादों को सुलझाने का अवसर मिलेगा। यदि किसी व्यक्ति को अपनी जमीन की सीमा या रिकॉर्ड को लेकर आपत्ति है, तो वह सर्वे के दौरान निर्धारित प्रक्रिया के तहत शिकायत दर्ज कर सकेगा। इससे सभी पक्षों को अपनी बात रखने का अवसर मिलेगा और निष्पक्ष समाधान संभव हो सकेगा। गौरतलब है कि इस क्षेत्र में अंतिम बार वर्ष 1970 में पारंपरिक तरीकों से सर्वे किया गया था, जिसमें कई स्थानों पर त्रुटियां रह गई थीं। अब आधुनिक तकनीक से किया जा रहा यह सर्वे उन कमियों को दूर करेगा।
Aima media झालावाड़