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मानव-वन्यजीव संघर्ष के पीड़ितों को न्याय तक पहुंच योजना के बारे में किया जागरूक

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से मानव-वन्यजीव संघर्ष के पीड़ितों को न्याय तक पहुंच योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए पैनल अधिवक्ताओं, अधिकार मित्रों का दो दिवसीय हाईब्रिड प्रशिक्षण मंगलवार से शुरू हुआ। प्रशिक्षण की अध्यक्षता जिला सचिव शशि गजराना कर रही हैं।
शशि गजराना ने कहा कि वन क्षेत्रों से सटे आबादी इलाकों में वन्यजीवों की आवाजाही बढ़ रही है। वन्यजीव जंगल की सीमा तक सीमित नहीं रहे। आबादी में घुसते दिख रहे हैं। इससे मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं हो रही हैं। यह मानव जीवन के साथ वन्यजीवों के लिए भी गंभीर खतरा बन रहा है। उन्होंने कहा कि किसी वन्यजीव के हमले में व्यक्ति घायल हो या मृत्यु हो जाए तो सूचना संबंधित थाने, स्थानीय वन अधिकारी को देनी चाहिए। घायल का मेडिकल जरूरी है। मृत्यु होने पर पोस्टमार्टम जरूरी है।
उन्होंने कहा कि अगर वन्यजीव पालतू जानवर गाय, बैल, भैंस, बछड़ा, ऊंट को घायल करे या उसकी मृत्यु हो जाए तो इसकी रिपोर्ट भी संबंधित थाने, स्थानीय वन अधिकारी को देनी चाहिए। घायल पशु की मेडिकल रिपोर्ट भी जरूरी है।

प्राधिकरण सचिव ने बताया कि योजना का उद्देश्य पीड़ितों को कानूनी मदद, मुआवजा, सहयोग उपलब्ध कराना है। योजना के तहत जिले में अधिकार मित्रों के माध्यम से पीड़ितों को उनके कानूनी अधिकार, मुआवजे के तरीकों के बारे में जागरूक किया जाएगा।
प्रशिक्षण में खानपुर रेंजर सत्यवीर सिंह ने जंगल के किनारे रहने वाले, आदिवासी इलाकों में रहने वाले प्रभावित लोगों के लिए राज्य सरकार की मुआवजा योजना की विस्तृत जानकारी दी। वनपाल प्रेमचंद यादव ने गागरोन रेंज में जंगली जानवरों के हमलों, उनके व्यवहार के बारे में जानकारी दी।
Aima media झालावाड़

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