अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निवारण मामलों की विशेष न्यायाधीश ने दण्डनीय अपराध का संज्ञान लिया
एससी एसटी कोर्ट की विशिष्ट न्यायाधीश सुनीता मीणा ने मास्टर कॉलोनी निवासी एक महिला की शिकायत पर तत्कालीन थानाधिकारी चन्द्रज्योति शर्मा और कांस्टेबल राजेश स्वामी के खिलाफ गंभीर धाराओं में प्रसंज्ञान लेते हुए उन्हें समन जारी कर तलब किया है। कोर्ट ने माना कि पुलिसकर्मियों ने बिना तलाशी वारंट के एक महिला के घर में प्रवेश किया, उसके साथ धक्का-मुक्की करने के साथ गिरफ्तारी के झूठे दस्तावेज तैयार किए।
एडवोकेट प्रेमचंद मीणा ने बताया कि खंडिया कॉलोनी निवासी विद्या मीणा ने परिवाद पेश किया था कि 2 नवंबर 2024 को तत्कालीन सीआई चन्द्रज्योति शर्मा और राजेश स्वामी सादे कपड़ों में उनके घर आए। वे उसके देवर गोलू की तलाश कर रहे थे। जब पीड़िता ने बताया कि वह घर पर नहीं है, तो पुलिसकर्मियों ने जातिसूचक शब्दों से अपमानित किया। कांस्टेबल राजेश स्वामी ने उसके साथ धक्का-मुक्की की, जिससे उसकी चूड़ियां टूट गईं। पुलिस ने पीड़िता और उसके पति अनिल मीणा को जबरन हिरासत में लिया और शांतिभंग के झूठे मामले में पाबंद कराया था।
महिला को मादक पदार्थ तस्करी केस में फंसाने का दोषी माना था कोर्ट की टिप्पणी... सादा वर्दी में घर घुसना और झूठे दस्तावेज बनाना पुलिस का पदीय कर्तव्य नहीं विशिष्ट न्यायाधीश सुनीता मीणा ने आदेश में कहा कि सादे वस्त्रों में बिना वारंट घर में घुसना, झूठे रोजनामचा रपट तैयार करना और सदोष परिरोध करना किसी भी पुलिस अधिकारी के आधिकारिक कर्तव्य के दायरे में नहीं आता। इस पर कोर्ट ने तत्कालीन सीआई चन्द्रज्योति शर्मा और कांस्टेबल राजेश स्वामी को तलब किया है
। सीसीटीवी ने खोली पुलिस की पोल: पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि विद्या का पति मौके से फरार हो गया था और बाद में रात को थाने आया, लेकिन पीड़िता की ओर से पेश किए गए घर के सीसीटीवी फुटेज में साफ दिखा कि पुलिस दोपहर में ही दंपती को एक साथ जीप में बैठाकर ले गई थी।
कोर्ट ने इसे दस्तावेजों में हेरफेर माना। पिछले साल सितंबर माह में भी एनडीपीएस कोर्ट ने भी तत्कालीन कोतवाली थानाधिकारी चंद्रज्योति शर्मा को झूठे सबूत जुटाकर गलत जांच कर महिला को मादक पदार्थ तस्करी के केस में फंसाने का दोषी माना था। इस मामले में कोर्ट ने पीड़िता को बरी करते हुए तत्कालीन सीआई के खिलाफ पुलिस महानिदेशक जयपुर को जांच कर कार्रवाई करने और कार्रवाई निर्णय से कोर्ट को अवगत कराने के आदेश जारी किए गए थे।
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