विश्व नृत्य दिवस पर संस्कृति और मानवता का संगम
आज पूरे विश्व में विश्व नृत्य दिवस बड़े ही उत्साह और उमंग के साथ मनाया जा रहा है। इस खास अवसर पर कला, स
विश्व नृत्य दिवस पर संस्कृति और मानवता का संगम
आज पूरे विश्व में विश्व नृत्य दिवस बड़े ही उत्साह और उमंग के साथ मनाया जा रहा है। इस खास अवसर पर कला, संस्कृति और मानवता का अनोखा संगम देखने को मिला। नृत्य केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि भावनाओं को व्यक्त करने, समाज को जोड़ने और मानवाधिकारों के प्रति जागरूकता फैलाने का एक सशक्त जरिया भी है।
भारत जैसे विविधताओं से भरे देश में नृत्य की परंपरा सदियों पुरानी है। कथक, भरतनाट्यम, ओडिसी, कुचिपुड़ी जैसे शास्त्रीय नृत्यों से लेकर लोक नृत्यों तक, हर शैली में हमारी संस्कृति और सामाजिक मूल्यों की झलक दिखाई देती है।
इस अवसर पर मानवाधिकार सुरक्षा एवं संरक्षण ऑर्गेनाइजेशन के तत्वावधान में कई सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जहां कलाकारों ने अपने नृत्य के माध्यम से समानता, स्वतंत्रता और भाईचारे का संदेश दिया। कार्यक्रम में बच्चों और युवाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का संकल्प लिया।
रिपोर्टर सूर्य प्रकाश पाण्डेय के अनुसार, “नृत्य एक ऐसी भाषा है जो बिना शब्दों के भी दिलों को जोड़ती है और समाज में प्रेम, शांति और एकता का संदेश देती है।”
इस दिन का मुख्य उद्देश्य लोगों को नृत्य के महत्व के प्रति जागरूक करना और इसे हर वर्ग तक पहुंचाना है, ताकि कला के माध्यम से मानवता और अधिकारों की रक्षा को और मजबूत किया जा सके।
रिपोर्टर: सूर्य प्रकाश पाण्डेय
मानवाधिकार सुरक्षा एवं संरक्षण ऑर्गेनाइजेशन