logo
Select Language
Hindi
Bengali
Tamil
Telugu
Marathi
Gujarati
Kannada
Malayalam
Punjabi
Urdu
Oriya

राजनीति में न कोई स्थाई दोस्त होता है, न दुश्मन, बस एक 'स्थाई कुर्सी' होती है। पश्चिम बंगाल के राजमहल में इन दिनों वही कुर्सी डगमगा रही है।

#TMC का मतलब वह नहीं है जिसे लोग अक्सर समझने की भूल करते हैं

कहते हैं राजनीति में न कोई स्थाई दोस्त होता है, न दुश्मन, बस एक 'स्थाई कुर्सी' होती है। पश्चिम बंगाल के राजमहल में इन दिनों वही कुर्सी डगमगा रही है। एक दौर था जब 'मोमता' की टीम में जमीनी लड़ाके हुआ करते थे, जो पसीने की गंध और धूल से पहचाने जाते थे। फिर प्रवेश हुआ राजकुमार भतीजे का

जब सत्ता का मोह बढ़ता है, तो विवेक अक्सर छुट्टी पर चला जाता है। दीदी को लगा कि पार्टी की कमान किसी 'अपने' को दी जाए। अब 'अपना' कौन? वही, जो सूट-बूट पहनकर संसद में अंग्रेजी झाड़ सके। नतीजा यह हुआ कि रेवड़ियाँ बँटने लगीं—अपनों को, खासों को और उनके चमचों को। पुराने वफादार किनारे लगा दिए गए, जैसे चाय से मक्खी निकाली जाती है।

सियासत के मैदान में जहाँ पहले पसीने से लथपथ नेता दिखते थे, वहाँ अब 'सुंदरी ब्रिगेड' का कब्जा है। 'टीम अभिषेक' ने राजनीति को रैंप वॉक बना दिया। संसद में बहस कम और 'इंस्टाग्राम रील्स' ज्यादा बनने लगीं।

कलयुग की सबसे बड़ी कॉमेडी तो अब शुरू हुई है। जो नेता कभी दीदी की एक आवाज पर 'दीदी-ओ-दीदी' करते नहीं थकते थे, अब उनका फोन 'स्विच ऑफ' आ रहा है।

ये नेता दिल्ली की ठंडी हवाओं में अपनी नई 'सेटिंग' ढूँढ रहे हैं। बताया जा रहा है कि इनमें से कई 'अति-महत्वाकांक्षी' सुंदरियाँ अब दीदी के फोन को 'स्पैम कॉल' समझने लगी हैं। सत्ता की नाव डूबते देख चूहे सबसे पहले भागते हैं, पर यहाँ तो पूरी की पूरी 'ब्रिगेड' ही लाइफ जैकेट पहनकर गायब है।

यह उस "पुत्र लाइक भतीजे" की रणनीति का कमाल है जिसने पुराने बरगदों को काटकर गमले में लगे सजावटी पौधों (सिंदूरी ब्रिगेड) को तवज्जो दी। अब जब आंधी आई है, तो गमले वाले पौधे सबसे पहले उड़ रहे हैं।


दीदी: फोन लगा रही हैं, पर उधर से जवाब आ रहा है— जिस व्यक्ति को आप कॉल कर रहे हैं, वह फिलहाल सत्ता के दूसरे टावर की रेंज में है।

यह हास्य नहीं, बल्कि उन लोगों के लिए एक सबक है जो राजनीति को 'पारिवारिक लिमिटेड कंपनी' बना देते हैं। जब 'भतीजावाद' का नशा चढ़ता है, तो वफादारी की एक्सपायरी डेट पास आ जाती है। बंगाल के इस 'खेला' में अब सबसे बड़ा सवाल यही है: अगला फोन किसका उठेगा और कौन 'नॉट रिचेबल' होगा?
सत्ता खिसक रही है, चेहरे बदल रहे हैं, और कलयुग का यह प्रहसन अब अपने क्लाइमेक्स की ओर बढ़ रहा है!

#MamataBanerjee #BengalPolitics #kolkata #Howrah

0
46 views

Comment