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"बिहार की पंचायतों में 'तीसरी आँख' का पहरा – सुरक्षा और सुशासन की नई परिभाषा"



विजय कुमार, वरिष्ठ पत्रकार

पटना:
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 27 अप्रैल 2026 को एक और ऐतिहासिक घोषणा कर दी — राज्य की 8,053 ग्राम पंचायतों में CCTV कैमरे लगाए जाएंगे। बैठक संपन्न हुई, निर्देश जारी हुए।

बिहार की ग्रामीण शासन व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव आने वाला है। हाल ही में नगर विकास एवं पंचायती राज विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान, राज्य सरकार ने बिहार की प्रत्येक ग्राम पंचायत में सीसीटीवी (CCTV) कैमरे लगाने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है।

यह कदम न केवल ग्रामीण सुरक्षा को सुदृढ़ करेगा, बल्कि सार्वजनिक व्यवस्था और अपराध नियंत्रण की दिशा में एक 'गेम चेंजर' साबित हो सकता है।

​विश्लेषण:
​सुरक्षा का विकेंद्रीकरण:
अब तक सीसीटीवी कैमरों की निगरानी केवल शहरी क्षेत्रों तक सीमित थी।
हर ग्राम पंचायत के सार्वजनिक स्थलों और प्रमुख चौराहों पर कैमरे लगाने से ग्रामीण इलाकों में अपराधियों के मन में डर पैदा होगा और घटनाओं की जाँच में पुलिस को सटीक साक्ष्य मिल सकेंगे।

​प्रौद्योगिकी का उपयोग:
8,053 पंचायतों को इस सुरक्षा घेरे में लाना एक विशाल परियोजना है।
इसके साथ ही 'सीएम ग्रामीण सोलर स्ट्रीट लाइट योजना' को प्रभावी ढंग से लागू करने और उसकी मॉनिटरिंग के लिए सिस्टम विकसित करना यह दर्शाता है कि सरकार तकनीक के जरिए पारदर्शिता लाना चाहती है।

​शहरी विकास और कनेक्टिविटी:
बैठक में केवल ग्रामीण ही नहीं, बल्कि शहरी विकास पर भी जोर दिया गया है।
पटना मेट्रो के 'मलाही पकड़ी से राजेंद्र नगर' रूट को जल्द चालू करने का निर्देश राजधानी की यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

​जनकल्याणकारी योजनाएं:
प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के शेष लाभार्थियों को जल्द आवास उपलब्ध कराने और मोक्षधाम (शवदाह गृह) निर्माण के निर्देश समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति की बुनियादी जरूरतों के प्रति संवेदनशीलता प्रकट करते हैं।

​चुनौतियां और राह:
किसी भी बड़ी योजना की सफलता उसके क्रियान्वयन (execution) पर निर्भर करती है। सीसीटीवी कैमरों का रखरखाव (maintenance) और उनकी निरंतर मॉनिटरिंग के लिए एक समर्पित टीम की आवश्यकता होगी। साथ ही, ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली और इंटरनेट की निरंतरता इन कैमरों की कार्यक्षमता के लिए अनिवार्य है।

​निष्कर्ष:
बिहार सरकार का यह कदम राज्य के ग्रामीण अंचल को आधुनिक और सुरक्षित बनाने की दिशा में एक सराहनीय प्रयास है।
यदि इन योजनाओं को समयबद्ध तरीके से और बिना किसी भ्रष्टाचार के धरातल पर उतारा गया,
तो बिहार का पंचायती राज मॉडल पूरे देश के लिए एक उदाहरण बन सकता है।
'तीसरी आँख' का यह पहरा गांवों में शांति और विकास की नई इबारत लिखेगा।

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