बैढ़न में अवैध रेत कारोबार पर सवाल, नेताओं के प्रभाव में खनिज विभाग की कार्रवाई शून्य
बैढ़न में अवैध रेत कारोबार पर सवाल, नेताओं के प्रभाव में खनिज विभाग की कार्रवाई शून्य
सत्ताधारी व विपक्षी नेताओं के नाम पर चल रहा रेत का खेल, शिकायतों के बावजूद नहीं हो रही ठोस कार्रवाई
सिंगरौली जिले के बैढ़न कोतवाली थाना क्षेत्र में अवैध रेत खनन और परिवहन का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। आरोप है कि भाजपा के मंडल अध्यक्ष के बेटे और कांग्रेस से जुड़े दो नेताओं के प्रभाव में अवैध रेत का कारोबार खुलेआम फल-फूल रहा है, जबकि खनिज विभाग और पुलिस की कार्रवाई लगभग शून्य बनी हुई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सफेदपोश नेताओं की आड़ में रेत माफिया बेखौफ होकर नदी घाटों से अवैध खनन कर रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि न तो पुलिस इन पर शिकंजा कस पा रही है और न ही खनिज विभाग कोई प्रभावी कदम उठा रहा है।
ग्रामीणों के मुताबिक, क्षेत्र में बड़े पैमाने पर रेत का अवैध भंडारण किया गया है और नियमों के विपरीत खनन का काम लगातार जारी है। खासतौर पर “सहकार ग्लोबल” का नाम भी चर्चा में है, जिस पर नियमों को ताक पर रखकर काम करने के आरोप लगाए जा रहे हैं।
लोगों का यह भी आरोप है कि खनिज विभाग के अधिकारी केवल छोटी-मोटी कार्रवाई कर अपनी पीठ थपथपा रहे हैं, जबकि बड़े स्तर पर चल रहे अवैध कारोबार को नजरअंदाज किया जा रहा है। शिकायतें और आवेदन देने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है, जिससे ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि अधिकारी फील्ड में जाने के बजाय दफ्तर तक सीमित हैं और जन समस्याओं को सुनने में भी रुचि नहीं दिखा रहे। इससे साफ संकेत मिलते हैं कि विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
अब लोगों की उम्मीद जिला कलेक्टर और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री से जुड़ गई है। ग्रामीणों ने मांग की है कि जिम्मेदार अधिकारियों को हटाकर ऐसे अधिकारियों की नियुक्ति की जाए जो निष्पक्ष जांच कर अवैध खनन पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करें।
बैढ़न क्षेत्र में अवैध रेत कारोबार का मुद्दा केवल प्रशासनिक लापरवाही ही नहीं, बल्कि राजनीतिक संरक्षण के आरोपों से भी घिरता जा रहा है। ऐसे में देखना होगा कि प्रशासन कब तक इस पर प्रभावी कार्रवाई करता है और आम जनता को राहत मिल पाती है या नहीं।
इनका कहना है
खनिज अधिकारी मैडम ऑफिस के एसी के हवा में बैठकर कार्यवाही करने की दावा करती है जबकि जमीनी हकीकत से यह कोसों दूर नजर आती है हालांकि जब मौखिक रूप से इन्होंने जानकारी दी की वीडियो साक्ष्य नहीं होती बल्कि हमें आप मौके पर पकड़वाए इससे तो साफ जाहिर होता है कि मैडम अपने कर्तव्यों के निर्वहन के लिए कितनी ईमानदार है पत्रकारों को इस प्रकार से कह रही है जैसे कि यह पत्रकारों को ड्यूटी पर रख रखा है यानी अब पत्रकार अपने खबरों को छोड़ कर सरकारी दफ्तरों की पैरवी में जुड़ जाए इस तरह से बोलना आखिर खनिज अधिकारी का कहा तक सही है ये बड़ा सवाल है