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सच्चाई कड़वी है, लेकिन सच है… आज के दौर में एक अजीब सा बदलाव देखने को मिल रहा है। मां-बाप अपनी पूरी जिंदगी अपने बच्चों के लिए खपा देते हैं — उनकी पढ़ा

सच्चाई कड़वी है, लेकिन सच है…
आज के दौर में एक अजीब सा बदलाव देखने को मिल रहा है।
मां-बाप अपनी पूरी जिंदगी अपने बच्चों के लिए खपा देते हैं —
उनकी पढ़ाई, उनके सपने, उनकी खुशियों के लिए हर मुश्किल सहते हैं।
लेकिन जब वही बच्चे बड़े हो जाते हैं,
तो अक्सर कुछ बेटे मां-बाप के पैसों पर ऐश करते नजर आते हैं।
जिम्मेदारी से दूर, कर्तव्य से अनजान…
सच्चाई यह है कि—
मां-बाप के पैसों पर ऐश करने वाले बेटे तो बहुत मिल जाएंगे,
लेकिन बेटे के पैसों पर चैन से जीने वाले मां-बाप बहुत कम मिलते हैं।
ये सिर्फ एक लाइन नहीं, समाज का आईना है।
जहां माता-पिता त्याग करते हैं,
वहीं कुछ बच्चे उस त्याग की कीमत समझने में पीछे रह जाते हैं।
जरूरत है सोच बदलने की…
जरूरत है यह समझने की कि
मां-बाप बोझ नहीं, हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी और आशीर्वाद हैं।
जो अपने माता-पिता का सम्मान करता है,
वही असली मायनों में सफल इंसान कहलाता है।
👉 आइए, आज एक संकल्प लें —
मां-बाप को सिर्फ शब्दों में नहीं, अपने कर्मों में सम्मान दें।

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