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टाटानगर: ट्रेनों की लेटलतीफी पर रेलवे ने तोड़ी चुप्पी, सीनियर डीसीएम बोले– पंक्चुअलिटी 35% से बढ़कर 75% तक पहुंची, अब नहीं होगा घंटों इंतजार

जमशेदपुर: चक्रधरपुर रेल मंडल में ट्रेनों की लगातार लेटलतीफी को लेकर यात्रियों के बढ़ते आक्रोश और विरोध के बीच रेलवे प्रशासन ने पहली बार खुलकर अपना पक्ष रखा है। टाटानगर स्टेशन पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में रेलवे के सीनियर डीसीएम आदित्य चौधरी ने दावा किया कि पिछले 15 दिनों में ट्रेन संचालन में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। उन्होंने बताया कि जो पंक्चुअलिटी पहले महज 35 प्रतिशत तक सिमट गई थी, वह अब सुधरकर 65 से 75 प्रतिशत के बीच पहुंच चुकी है।
सीनियर डीसीएम ने कहा कि रेलवे प्रशासन लगातार मॉनिटरिंग कर रहा है और ट्रेन परिचालन को पटरी पर लाने के लिए बड़े स्तर पर काम किया जा रहा है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि आने वाले दिनों में यात्रियों को और बेहतर परिणाम देखने को मिलेंगे।
120 मिनट की देरी अब सिमटकर 15-20 मिनट में
आदित्य चौधरी ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि पहले कई ट्रेनें औसतन 120 मिनट तक लेट चल रही थीं, लेकिन अब उनकी देरी घटकर 15 से 20 मिनट के भीतर आ गई है। उन्होंने कहा कि सिर्फ समय पर ट्रेन चलाने पर ही नहीं, बल्कि देरी के अंतराल को कम करने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। रेलवे के अधिकारी स्तर पर हर ट्रेन की व्यक्तिगत निगरानी की जा रही है ताकि परिचालन में किसी तरह की बाधा न आए।
चोक पॉइंट खत्म करने के लिए बिछेगा नई लाइनों का जाल
रेल मंडल में ट्रैफिक जाम की समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए कई बड़ी आधारभूत परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इसके तहत सीनी-चाईबासा और गम्हरिया-चांडिल के बीच तीसरी और चौथी लाइन बिछाने की योजना पर काम हो रहा है। इससे ट्रायंगल सेक्शन का दबाव कम होगा और ट्रेनों की आवाजाही अधिक सुगम बनेगी।
इसके साथ ही आसनबनी से बागबेड़ा तक चौथी लाइन और आदित्यपुर से टाटा के बीच थर्ड लाइन का काम भी पूरा किया जा रहा है। सीनी से राजखरसावां के बीच पांचवीं और छठी लाइन बिछाने की योजना भी तैयार है, जिससे झाड़सुगुड़ा और चांडिल की ओर से आने वाली ट्रेनों को वैकल्पिक मार्ग मिल सकेगा।
मालगाड़ियों के लिए अलग रास्ता, पैसेंजर ट्रेनों को प्राथमिकता
सीनियर डीसीएम ने यह भी स्पष्ट किया कि यात्री ट्रेनों की तुलना में मालगाड़ियों को प्राथमिकता दिए जाने की बात पूरी तरह गलत है। उन्होंने बताया कि रविवार को कुल 47 यात्री ट्रेनें इस सेक्शन से गुजरीं, जबकि मालगाड़ियों की संख्या 32 से 35 के बीच रही।
उन्होंने कहा कि भविष्य में डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFC) से जुड़ने के बाद मालगाड़ियों को अलग ट्रैक पर शिफ्ट कर दिया जाएगा। इससे मुख्य रेल लाइन पूरी तरह पैसेंजर ट्रेनों के लिए उपलब्ध होगी और यात्री ट्रेनें 130 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ सकेंगी।
हाथियों की आवाजाही और भौगोलिक चुनौतियां भी बड़ी वजह
रेलवे अधिकारियों ने माना कि इस रेल मंडल में कई भौगोलिक चुनौतियां हैं। खासकर एलिफेंट कॉरिडोर वाले इलाकों में ट्रेनों की गति नियंत्रित करनी पड़ती है ताकि वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। इसके अलावा कई जगह तकनीकी और ट्रैक संबंधित बाधाएं भी हैं, जिनके समाधान पर काम जारी है।
अधिकारी ने कहा कि रेलवे यात्रियों को बेहतर सुविधा देने के लिए प्रतिबद्ध है। जनता से मिल रहे फीडबैक को गंभीरता से लिया जा रहा है और अगले दो हफ्तों में स्थिति और बेहतर होने की उम्मीद है। रेलवे प्रशासन का दावा है कि बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट पूरे होते ही चक्रधरपुर मंडल में ट्रेनों की लेटलतीफी बीते दिनों की बात बन जाएगी।

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