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पूर्वोत्तर के बाँस उद्योग को समर्थन देने की अपील, प्रधानमंत्री मोदी का आह्वान


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में देशवासियों से पूर्वोत्तर भारत के कारीगरों का समर्थन करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि लोग अधिक से अधिक बाँस से बने उत्पाद खरीदें और उन्हें उपहार के रूप में अपनाएँ, जिससे स्थानीय artisans को आर्थिक मजबूती मिल सके। प्रधानमंत्री ने बताया कि पहले ब्रिटिश कालीन कानूनों के तहत बाँस को “पेड़” की श्रेणी में रखा गया था, जिससे उसके कटान और परिवहन पर कई प्रतिबंध थे। लेकिन वर्ष 2017 में एक महत्वपूर्ण नीति बदलाव के तहत बाँस को “घास” के रूप में पुनर्वर्गीकृत किया गया, जिससे इस क्षेत्र में व्यापार और उत्पादन को नई गति मिली। उन्होंने कहा कि इस सुधार के बाद पूर्वोत्तर राज्यों में बाँस उद्योग तेजी से विकसित हुआ है, जिससे रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं और छोटे उद्यमों को बढ़ावा मिला है। विशेष रूप से महिलाओं की भागीदारी इस क्षेत्र में उल्लेखनीय रूप से बढ़ी है, जो स्वयं सहायता समूहों और सूक्ष्म उद्योगों के माध्यम से आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी जोर दिया कि बाँस उत्पाद पर्यावरण के अनुकूल हैं और सतत विकास की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे इन उत्पादों को बढ़ावा देकर न केवल कारीगरों की आय बढ़ाएँ, बल्कि पूर्वोत्तर क्षेत्र—जिसे उन्होंने “अष्टलक्ष्मी” कहा—की आर्थिक प्रगति में भी योगदान दें। उन्होंने कहा कि यह पहल आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को साकार करने के साथ-साथ स्थानीय संस्कृति और परंपराओं को संरक्षित रखने में भी सहायक सिद्ध होगी।

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