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पटना :ग्रीनफील्ड सेटेलाइट टाऊनशिप के लिये तैयार ?

पटना, 27 अप्रैल 2026: बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी 11 ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप योजना में राजधानी पटना का पाटलिपुत्र सैटेलाइट टाउनशिप सबसे बड़ा प्रोजेक्ट है, लेकिन विशेषज्ञों और सरकारी अधिकारियों के अनुसार पटना इस विशाल परियोजना के लिए अभी पूरी तरह तैयार नहीं है। योजना अभी नियोजन और तैयारी के शुरुआती चरण में है, जबकि वास्तविक निर्माण कार्य शुरू होने में कम से कम 1-2 साल का समय लग सकता है।
पटना के आसपास प्रस्तावित पाटलिपुत्र टाउनशिप में 9 प्रखंडों (पुनपुन, फतुहा, संपतचक, नौबतपुर, पटना ग्रामीण, दानियावां, धनरुआ, मसौढ़ी, फुलवारी आदि) के लगभग 275 राजस्व गांव शामिल किए गए हैं। अनुमानित क्षेत्रफल 81,000 एकड़ (विशेष क्षेत्र) तक बताया जा रहा है, जिसमें 1,000-1,200 एकड़ का कोर एरिया भी शामिल है।
22 अप्रैल को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की पहली कैबिनेट बैठक में इस योजना को मंजूरी मिलने के तुरंत बाद इन क्षेत्रों में जमीन की खरीद-बिक्री, हस्तांतरण, विकास कार्य और नए निर्माण पर सख्त रोक लगा दी गई है। पटना सहित कई शहरों के लिए यह रोक 31 मार्च 2027 तक लागू रहेगी।
पटना की तैयारियों की वर्तमान स्थिति 9 प्रखंडों के गांवों को चिह्नित कर लिया गया है। पटना के लिए अलग जोनल प्लान तैयार किया जा रहा है, जिसे मार्च 2027 तक अधिसूचित करने का लक्ष्य है। जिला प्रशासन भूमि सत्यापन, रिकॉर्ड जांच और हितधारकों से परामर्श शुरू करेगा। लैंड पूलिंग मॉडल पर भी विचार है, जिसमें किसानों को विकसित जमीन का हिस्सा वापस मिल सकता है।
जहाँ तक इंफ्रास्ट्रक्चर की बात करे आधुनिक सड़कें, पानी, सीवेज, बिजली, ग्रीन स्पेस और मुख्य शहर से बेहतर कनेक्टिविटी की योजना है, लेकिन इनकी विस्तृत डिजाइन और फंडिंग अभी बाकी है।

सरकारी सूत्रों और विशेषज्ञों के अनुसार मुख्य चुनौतियां है भूमि अधिग्रहण की जटिल प्रक्रिया और स्थानीय लोगों के बीच संभावित विरोध।
बड़े पैमाने पर फंडिंग और पर्यावरणीय मंजूरी। पटना पहले से ही ट्रैफिक, जलजमाव और बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहा है, जिसे नई टाउनशिप को ध्यान में रखकर संबोधित करना होगा। पिछले कई शहरी विकास योजनाओं के अनुभव से पता चलता है कि अमल में देरी आम समस्या रही है।

सरकार का दावा है कि यह टाउनशिप नोएडा-ग्रेटर नोएडा जैसी आधुनिक, इको-फ्रेंडली और प्लान्ड सिटी बनेगी, जो पटना पर बढ़ते दबाव को कम करेगी और रोजगार के नए अवसर पैदा करेगी।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की सरकार इसे बिहार के शहरी विकास में ऐतिहासिक कदम बता रही है, लेकिन सफलता भूमि मालिकों के हितों की रक्षा, पारदर्शी प्रक्रिया और समयबद्ध अमल पर निर्भर करेगी।
यदि योजना सही तरीके से लागू हुई तो पटना का नक्शा बदल सकता है, लेकिन फिलहाल यह नीति स्तर पर आगे बढ़ रही है, व्यावहारिक रूप से अभी काफी काम बाकी है।
✍️ मेरी कलम से
पुरुषोत्तम झा
@pranamya_parash on X

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