ज्ञापन के साथ गौ माता को बनाए
राष्ट्र माता के नारे
ज्ञापन के साथ गौ माता को बनाएं राष्ट्र माता के लगे नारे
रिपोर्ट -
भगवानदास शाह
जिला बुरहानपुर
मध्यप्रदेश
बुरहानपुर । गौ सम्मान आह्वान अभियान के अंतर्गत जिले के सैकड़ों गौभक्तों ने तहसील कार्यालय, बहादरपुर रोड तक शांतिपूर्ण एवं अनुशासित सांकेतिक रैली निकाली। रैली के उपरांत गौभक्तों ने तहसीलदार महोदय को मुख्य आवेदन पत्र सौंपा जिसमें महामहिम राष्ट्रपति महोदय, माननीय प्रधानमंत्री महोदय, मुख्यमंत्री महोदय एवं राज्यपाल महोदय के नाम गोवंश संरक्षण, संवर्धन एवं सम्मान से संबंधित विस्तृत संवैधानिक मांगें रखी गई हैं।
अभियान के जिला संरक्षक ठाकुर प्रियांक सिंह ने कहा यह अभियान किसी राजनीतिक दल या संस्था का नहीं बल्कि वेदलक्षणा गोमाता एवं नंदी बाबा की प्रेरणा से राष्ट्रप्रेमी भारतवासियों द्वारा स्वस्फूर्त रूप से संचालित है।
जिला संयोजक देवा मराठे, महेश चौहान, प्रीतम महाजन ने बताया अभियान पूर्णतः निस्वार्थ, अहिंसक एवं राष्ट्रहित में है। जिला प्रभारी प्रकाश पालीवाल व सत्यनारायण लड्ढा ने जोर देकर कहा कि गोवंश हमारी सांस्कृतिक धरोहर, ग्रामीण अर्थव्यवस्था का आधार और पर्यावरण संरक्षण का प्रतीक है। इसे बचाना हर भारतवासी का संवैधानिक एवं नैतिक कर्तव्य है।
दिनेश सुगंधी, आशीष शर्मा, गायत्री मोरे ने सभी गोभक्तों, संतों एवं जागरूक नागरिकों से अपील की कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में इस अभियान को और मजबूती प्रदान करें।
राजेश बजाज, मुकेश डालमिया, हेमंत दलाल, दिनेश राठौर, नारायण चंदेल, सागर कोली सहित सैकड़ों गौभक्त, संत समाज के प्रतिनिधि एवं जागरूक नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। गौभक्तों ने गोमाता के प्रति अपनी अटूट श्रद्धा और राष्ट्रहित की भावना से ओत-प्रोत होकर इस कार्यक्रम में भाग लिया।
ज्ञापन के मुख्य बिंदु:
ज्ञापन में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 48 (राज्य के नीति-निर्देशक तत्व) एवं अनुच्छेद 51A(g) (मूल कर्तव्य) की मूल भावना का हवाला देते हुए निम्नलिखित प्रमुख मांगें की गई हैं:
1. अखिल भारतीय वेदलक्षणा गोवंश को "राष्ट्रमाता / राष्ट्र आराध्या" का संवैधानिक दर्जा प्रदान किया जाए तथा इसे विधिक व्यक्तित्व (Legal Person) के रूप में मान्यता दी जाए।
2. गोवंश की तस्करी, क्रूर वध एवं किसी भी प्रकार की शारीरिक क्षति को संज्ञेय एवं गैर-जमानती अपराध घोषित कर राष्ट्रव्यापी कठोर सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
3. केंद्रीय गोसेवा मंत्रालय की स्थापना की जाए तथा विभिन्न राज्यों में प्रचलित असंगत गोसंरक्षण कानूनों को निरस्त कर एक एकीकृत केंद्रीय गोसेवा एवं संरक्षण अधिनियम बनाया जाए, जिसमें आजीवन कारावास जैसे कठोर दंडात्मक प्रावधान एवं संपत्ति राजसात् (कुर्की) के प्रावधान शामिल हों।
4. प्रत्येक जिले में न्यूनतम एक आदर्श गोअभयारण्य तथा हर ग्राम पंचायत स्तर पर नंदीशाला की स्थापना अनिवार्य की जाए।
5. समस्त गोचर, ओरण, आगोर एवं पारंपरिक गोभूमियों को अतिक्रमण मुक्त कर गोचर विकास बोर्ड गठित किया जाए तथा चारे के अवैध संग्रहण एवं मूल्य वृद्धि पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए।
6. गो-आधारित प्राकृतिक कृषि (Cow-based Natural Farming) को प्रोत्साहन देने हेतु विशेष पैकेज, पंचगव्य अनुसंधान केंद्रों की स्थापना, गव्य चिकित्सा को मान्यता एवं गो-उत्पादों के विपणन के लिए सरकारी सहायता प्रदान की जाए।
7. राष्ट्रीय एवं राज्य राजमार्गों पर गो-वाहिनी एम्बुलेंस तथा ट्रॉमा सेंटर स्थापित किए जाएँ ताकि दुर्घटनाग्रस्त गोवंश को तत्काल उपचार मिल सके।
8. स्कूली पाठ्यक्रम में गो-विज्ञान को अनिवार्य विषय बनाया जाए तथा गोवंश के आध्यात्मिक, वैज्ञानिक, औषधीय एवं आर्थिक महत्व को भावी पीढ़ी तक पहुंचाया जाए।