खैर चोरी कांड में बड़ा सवाल: निलंबित DFO विशाल कौशिक की बहाली के साथ फिर उसी जगह पोस्टिंग
पंचकूला। खैर के पेड़ों की कथित चोरी के मामले में निलंबित किए गए डीएफओ विशाल कौशिक की बहाली और महज एक महीने के भीतर दोबारा उसी स्थान पर नियुक्ति ने प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है। हरियाणा वन एवं वन्यजीव विभाग के इस फैसले पर पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
विभागीय आदेश के मुताबिक, मोरनी-पिंजौर क्षेत्र में तैनात डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर (डीएफओ) विशाल कौशिक को 20 मार्च को निलंबित किया गया था। इसके बाद 22 अप्रैल को उन्हें बहाल कर दिया गया। हैरानी की बात यह है कि बहाली के साथ ही उन्हें फिर से पिंजौर में ही डीएफओ के पद पर तैनात कर दिया गया।
हालांकि आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि उनके खिलाफ चल रही विभागीय जांच जारी रहेगी, लेकिन इतने कम समय में निलंबन हटाकर उसी स्थान पर दोबारा पोस्टिंग को लेकर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
सूत्रों के अनुसार, यह पूरा मामला उस समय सामने आया था जब क्षेत्र में आसरेवाली खैर के पेड़ों की चोरी की घटनाएं चर्चा में थीं। ऐसे में इस फैसले ने मामले को और अधिक संवेदनशील बना दिया है।
प्रशासनिक विशेषज्ञों का कहना है कि सामान्य प्रक्रिया के तहत जांच लंबित रहने के दौरान संबंधित अधिकारी को किसी अन्य स्थान पर तैनात किया जाता है, ताकि जांच निष्पक्ष रह सके। लेकिन इस मामले में उसी स्थान पर पुनः नियुक्ति से विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
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