अमेरिका का राष्ट्रपति न हुआ किसी मेले का बैलून का निशाने वाला हो गया, टॉप सिक्यॉरिटी में सेंधमारी करके कोई फोटो शूट भी कर रहा है गया।
अमेरिका का राष्ट्रपति न हुआ, मुंगेर का मोहल्ला हो गया। हर दूसरे दिन कोई शूट करने पहुंच जा रहा है। अजीब ये है कि दुनिया की टॉप सिक्यॉरिटी में सेंधमारी करके कोई शूट भी कर रहा है तो उसका निशाना हर बार चूक जा रहा है। मतलब इतने टॉप लेवल के आदमी को मारने के लिये सर्कस में बंदूक चलाने वाला शूटर कैसे भेजा जा सकता है जो कभी बांह पर भी शूट नहीं कर पा रहा, सिर और शरीर तो दूर की बात है।
जब कोई इतनी सिक्यॉरिटी ब्रीच करने की महारत हासिल किये हो तो सिर्फ़ हवाई फ़ायरिंग करके या कान को ज़रा-सा छूकर गोली मारकर ख़ुद की जान जोखिम में डालेगा?
अमेरिका जैसे देश के राष्ट्रपति किसी देश में विज़िट पर भी आते हैं तो उनकी स्पेशल फ़ोर्स, यहां तक कि उनका वाहन तक अमेरिका से आता है। दूसरे देश की सिक्यॉरिटी के भरोसे कोई भी अमेरिकी राष्ट्रपति नहीं चला कभी। ये ख़ुद इतने धूर्त हैं कि इन्हें किसी पर भरोसा नहीं।
इससे पहले ट्रम्प पर जब हमला हुआ तो कमला हैरिस उनके सामने चुनावी मैदान में थीं। तथाकथित आधुनिक अमेरिका में ट्रम्प के पहले चुनाव में उन्होंने हिलेरी क्लिंटन को हराया। दूसरे में डेमोक्रैट्स को पता था कि बाइडन चुनाव लड़ने की स्थिति में नहीं हैं और कमला हैरिस स्वयं को स्थापित कर चुकी थीं। लेकिन पुरुषवादी अमेरिका ने बाइडन को अपना प्रतिनिधि तबतक रखा जबतक सार्वजनिक मंचों पर बदहवास होकर, बेसिर-पैर की प्रतिक्रिया देकर उन्होंने ख़ुद अपनी क्रेडिबिलिटी बर्बाद न कर ली।
चुनाव के आख़िरी दिनों में बाइडन की जगह कमला को प्रतिनिधित्व मिला तो मुक़ाबला रोमांचक हो गया। तबतक डॉनल्ड ट्रम्प पर गोली चल गयी जो ठीक से उनके कान पर भी नहीं लगी, एक एपिडर्मल टिशू से ज़्यादा का नुकसान भी न हुआ होगा और सहानुभूति ने रुख़ मोड़ दिया। ट्रम्प विजयी हुए।
अभी वही ट्रम्प दुनिया के सबसे अनचाहे नेता बन गये हैं, और दुनिया ही क्यों, उन्हें नापसंद करने वालों में बड़ी तादाद में अमेरिकी और रिपब्लिकन भी शामिल हैं। कारण? उनके बेतुके बयान और फ़रमान, वेनेज़ुएला पर नियंत्रण और ईरान के विरुद्ध युद्ध में ख़र्च हुई संपदा, चीफ़ ऑफ़ आर्मी सहित कई सीनियर ऑफ़िसर्स को बेदख़ल करना। इसके अलावा उनके मनमाने टैरिफ़ जो वे जब चाहें जितना चाहें लगाते-हटाते रहते हैं। आपने छोटे बच्चों को देखा है कहते हुए कि आज तुम मेरे टॉयज़ से खेल सकते हो, फिर आधे घंटे में सब छीनकर भगा देना कि मुझे तुम्हारे टॉयज़ नहीं पसंद, अब मैं तुम्हारे साथ नहीं खेलूंगा। बिल्कुल वही व्यवहार है डॉनल्ड ट्रम्प का और अमेरिकी इनसे तंग आ चुके हैं।
अब जब उनकी लोकप्रियता धाराशायी हो चुकी है, उनपर फिर से गोली चली है वह भी वाइट हाऊस के भीतर। मारने वाला अभेद्य गढ़ तक पहुंच गया, छू भी न सका और पकड़ा भी गया। अब ट्रम्प की कारस्तानियों पर चर्चा टल जाएगी, एप्स्टीन फ़ाइल्स तो कोई पूछता भी नहीं और शिकायतें सहानुभूति में बदल जाएंगी।
इससे पहले ट्रम्प पर वेनेज़ुएला वाले विषय पर लिखा था, लेकिन मेटा को पसंद नहीं आया। ज़करबर्ग़ को उसी अमेरिका में अपना घर भी तो चलाना है, सो मेरा अकाउंट रेस्ट्रिक्ट हो गया। फिर भी इस बार लिखने की हिमाक़त कर बैठी। देखेंगे जो होता है।
#DonaldTrump #Trump