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अफ्रीका से भी ज्यादा क्यों तपने लगा है भारत ! इसको समझना कोई रॉकेट साइंस थोड़े ही न हैं भाई । विकास की अपेक्षा है तो विनाश के लिए भी तैयार होना पड़ेगा

अफ्रीका से भी ज्यादा क्यों तपने लगा है भारत ! इसको समझना कोई रॉकेट साइंस थोड़े ही न हैं भाई । विकास की अपेक्षा है तो विनाश के लिए भी तैयार होना पड़ेगा ।

निःसंदेह भारत में इन्फ्रास्ट्रक्चर बहुत तेज गति से डेवलप हो रहा हैं, बहुत तेजी से नए सड़के जैसे कि हाईवे-एक्सप्रेसवे का निर्माण हो रहा है और पुराने सड़कों का चौड़ीकरण हो रहा हैं ।

उदाहरण स्वरूप मैं अपने बलिया (यूपी) कि बात बताता हूं। NH 31 पर कदम चौराहा से माल्देपुर तक सड़क के दोनों तरफ बहुत से बड़े बड़े वृक्ष थे, लेकिन ट्रैफिक कि समस्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है इसलिए NH 31 के लगभग 5.5 KM के इतने हिस्से पर चौड़ीकरण का कार्य शुरू हुआ, जो कि शहर के बीचोबीच से घनी बस्ती से होकर गुजरता हैं ।

चौड़ीकरण कि जद में आने वाले लोगों को इसकी चिंता तो थी कि उनका घर न टूटे लेकिन किसी को भी इस बात पर चिंतित होते हुए नहीं देखा कि सभी पेड़ कट रहे हैं और देखते ही देखते सड़क के दोनों तरफ के सभी पेड़ काट दिया गया । ग्रीन ट्रिब्यूनल सहित सभी जिम्मेदार संस्थाएं और अधिकारी आंख मूंदे रहे क्योंकि विकास का कार्य जो हो रहा था । ट्रैफिक कि समस्या से निजात दिलाने का कार्य जो हो रहा था, जो कि वास्तव में एक अस्थाई समाधान ही हैं । क्योंकि भारत कि मूल समस्या जनसंख्या वृद्धि हैं और इसका समाधान फिलहाल तो नजर नहीं आ रहा है क्योंकि जब बच्चा होने पर Rs. 6000 और नसबंदी करने पर मात्र Rs. 1500 दिया जाएगा तो यह कैसे रुकेगा ? 🤔

खैर सड़क चौड़ीकरण हो गया, Oneway हो गया, बीच में डिवाइडर भी बन गया । लेकिन पेड़ काटे जाने के उपरांत सड़क के दोनों किनारे पर एक भी पेड़ अब तक प्रशासन द्वारा नहीं लग पाया क्योंकि सड़क के दोनों किनारे पर खाली जमीन ही नहीं है, जिसमें पेड़ लगाया जा सके । सड़क बने हुए एक साल हो भी गए, अब टूटना भी शुरू हो गया लेकिन बीच के बने डिवाइडर में न तो आज तक छोटे पौधे लगे और न ही आज तक लाइट लगा और ना ही घनी बस्ती के मध्य से गुजरने के उपरांत भी स्पीड पर लगाम के लिए प्रशासन द्वारा कोई उपाय किया गया ।

हर साल करोड़ों रुपया खर्च हो रहा है वृक्षारोपण पर, IPL में हर डॉट बॉल पर एक पेड़ लगता हैं, लेकिन पेड़ कहां लग रहा है और लग भी रहा है तो लगने के बाद कहां गायब हो जा रहे है, पता ही नहीं चलता ! 🤔

अब आप स्वयं विचार करिए कि भारत अगर अफ्रीका और गल्फ देशों से भी ज्यादा तपने लगा है तो क्या हमें आश्चर्य करना चाहिए ? 🤔🤔

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