झारखंड के स्वास्थ्य ढांचे की बदहाली: 16 में से 11 सदर अस्पतालों में 'रक्त प्रोसेसिंग यूनिट' का अभाव
गढ़वा।
झारखंड के सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। दैनिक भास्कर की एक विशेष पड़ताल के अनुसार, राज्य के 16 जिलों के सदर अस्पतालों में से 11 के पास अपनी 'ब्लड प्रोसेसिंग यूनिट' नहीं है। इस कमी के कारण मरीजों को रक्त प्राप्त करने के लिए दो से चार दिनों तक का लंबा इंतजार करना पड़ रहा है, जो कई बार जानलेवा साबित होता है।
मरीजों पर दोहरी मार
ब्लड प्रोसेसिंग यूनिट न होने का सबसे ज्यादा खामियाजा गरीब मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। जो मरीज बाहर से रक्त खरीदने में सक्षम नहीं हैं, उन्हें अस्पतालों के चक्कर काटने पड़ते हैं। वहीं, कुछ लोग मजबूरी में बाहर से 2000 रुपये तक खर्च कर रक्त की व्यवस्था कर रहे हैं।
जांच सुविधाओं की कमी और संक्रमण का खतरा
रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य में रक्त की शुद्धता जांचने के लिए आवश्यक 'नेट टेस्ट' (NAT Test) की सुविधा केवल रिम्स (RIMS) में उपलब्ध है, जबकि एलिजा टेस्ट (Eliza Test) की सुविधा हजारीबाग में भी है। नेट टेस्ट की अनुपलब्धता के कारण संक्रमण (जैसे एचआईवी) का पता लगाने में देरी का जोखिम बना रहता है। हाल ही में चाईबासा में एक थैलेसीमिया मरीज को संक्रमित रक्त चढ़ाए जाने का मामला भी सामने आया था, जो सिस्टम की गंभीर लापरवाही को दर्शाता है।
इन जिलों में नहीं है प्रोसेसिंग यूनिट:
अस्पतालों की सूची के अनुसार, निम्नलिखित जिलों में यूनिट का अभाव है:
गढ़वा, पलामू, लातेहार, खूंटी, कोडरमा, जामताड़ा, चतरा, सरायकेला, गुमला, सिमडेगा और लोहरदगा।
जबकि रामगढ़, हजारीबाग, बोकारो, चाईबासा और गिरिडीह जैसे जिलों में यह सुविधा उपलब्ध है।
प्रशासनिक आश्वासन
मामले की गंभीरता को देखते हुए विभिन्न जिलों के सिविल सर्जनों ने जल्द सुधार का भरोसा दिया है। खूंटी के सिविल सर्जन के अनुसार, जिले में जल्द ही 'ब्लड सेपरेशन यूनिट' की स्थापना होगी, जिससे लोगों को प्लाज्मा और प्लेटलेट्स की सुविधा स्थानीय स्तर पर मिल सकेगी। वहीं, कोडरमा में पुराने भवन की रिपेयरिंग का काम युद्ध स्तर पर जारी है ताकि ब्लड बैंक का लाइसेंस पुनः प्राप्त किया जा सके।
सरकार ने अब यह अनिवार्य कर दिया है कि बिना 'ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट' के कोई भी नया रक्त प्रोसेसिंग यूनिट संचालित नहीं होगा, जिससे भविष्य में रक्त की गुणवत्ता में सुधार की उम्मीद है।