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ईरान जंग में खर्च हुई चीन के लिए रखी रिजर्व मिसाइलें

ईरान-अमेरिका युद्ध: खाली होता अमेरिकी शस्त्रागार और बदलती वैश्विक शक्ति 📉🇺🇸
ईरान के साथ चले 38 दिनों के युद्ध ने अमेरिका की सैन्य शक्ति और अर्थव्यवस्था पर गहरा दबाव डाल दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस जंग में अमेरिका ने अपने वे 'रिजर्व' हथियार भी खर्च कर दिए हैं, जो उसने चीन के खिलाफ संभावित युद्ध के लिए बचाकर रखे थे।
भारी सैन्य और आर्थिक नुकसान 💸
खर्च: 38 दिनों में लगभग $28-$35 अरब स्वाहा (यानी ₹90 अरब प्रतिदिन)।
मिसाइलों की कमी: 1100 से अधिक JASSM-ER (स्टील्थ) और 1000 से ज्यादा टॉमहॉक मिसाइलें दागी गईं।
पैट्रियट संकट: 1200 इंटरसेप्टर खर्च हुए, जबकि अमेरिका की वार्षिक उत्पादन क्षमता मात्र 600 है।
विमान हानि: बचाव मिशन के दौरान $275 मिलियन के दो MC-130 विमान और तीन हेलीकॉप्टर नष्ट।
वैश्विक प्रभाव: चीन और उत्तर कोरिया को मिला मौका? 🌍
हथियारों की कमी के कारण अमेरिका को अपनी रक्षा पंक्ति में बड़े बदलाव करने पड़े हैं:
एशिया: साउथ चाइना सी से 'USS अब्राहम लिंकन' को हटाकर मिडिल ईस्ट भेजा गया।
कोरिया: उत्तर कोरिया के खिलाफ तैनात THAAD सिस्टम के इंटरसेप्टर पहली बार वहां से हटाए गए।
यूरोप: रूस पर लगाम कसने के लिए NATO की सीमा पर तैनात हथियारों को भी डायवर्ट करना पड़ा।
निष्कर्ष: आगे की राह कठिन 🏭
पेंटागन ने उत्पादन बढ़ाने के लिए रक्षा कंपनियों के साथ 7 साल के करार तो किए हैं, लेकिन फंड की कमी के कारण भरपाई में कई साल लग सकते हैं। विशेषज्ञों की चेतावनी है कि यदि अब चीन-ताइवान संकट बढ़ता है, तो अमेरिका के लिए दो मोर्चों पर एक साथ लड़ना नामुमकिन होगा।

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