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अंधविश्वास पाखंडवाद को ताक पर रखकर समाज व बाबा साहब के संविधान को साक्षी मानकर बौद्ध धम्म के अनुसार रचाई शादी।

दौसा। राजस्थान के जयपुर जिले में गांव पड़ासोली तहसील बस्सी जयपुर में ग्राम पंचायत टोरड़ा अजारा की ढाणी,तहसील बैरावण्डा जिला दौसा के पंकज बैरवा पिता श्री भगवान सहाय चंद़वाल ने 25 अप्रैल 2026 सनिवार को रामकिशोर बैरवा (बैनिवाल) पिता श्री सोहन लाल जी बेनीवाल ग्राम पड़ासोली तहसील बस्सी जिला जयपुर से सुशीला देवी पत्नी श्री भगवान सहाय चंद़वाल पुत्र श्री स्वर्गीय छीतर मल चंद़वाल ने अपने सुपोत्र पंकज बैरवा एवं आरती बेनीवाल सुपुत्री श्रीमती शीला देवी एवं श्री रामकिशोर जी निवासी पड़ासोली तहसील बस्सी जिला जयपुर की आरती बैनिवाल कि पंकज बैरवा सुपुत्र श्रीमती सुशीला देवी पत्नी भगवान सहाय चंद़वाल एवं स्वर्गीय श्रीमती नारायणी देवी एवं श्री स्वर्गीय छीतर मल जी चंद्रवाल निवासी टोरड़ा अजारा वाली ढाणी ग्राम पंचायत सिकंदरा तहसील बैरावण्डा जिला दौसा के साथ शादी संपन्न हुई।

बहुजन समाज के लोगों द्वारा मनुवादी पाखंडवाद को ताक पर रख कर बौद्ध धर्म के अनुसार बाबा साहब भीमराव अंबेडकर व गौतम बुद्ध को तथा संविधान को साक्षी मानकर रचाई शादी,
हिंदू धर्म के अनुसार शादी में पाखंडवाद मनुवाद व झूठे आडंम्बर व्यर्थ का समय वह अंधविश्वास को दूर करते हुए बाबा साहब के अनुयायियों ने समाज को एक नया संदेश दिया।

संविधान को साक्षी मानकर बाबा साहब व गुरू गोतम बुद्ध प्रतिमा के सामने बौद्ध धम्म के अनुसार एक दूजा जीवन भर जीवनसाथी के रूप में प्रतिज्ञा की, हिंदू धर्म के अंधविश्वास को वह मनुवादी पाखंड को दूर करते हुए उन्होंने बहुजन को एक मजबूत समाज सुधारक संदेश प्रस्तुत किया। जिसमें वर और वधू के परिजनों ने बौद्ध धर्म की शादी को स्वीकार करते हुए वर वधु को शादी का प्रमाण पत्र भेंट कर आशीर्वाद दिया।

वर व वधू ने बाबा साहब गौतम बुद्ध की प्रतिमा के सामने दीपक जलाकर बौद्ध धर्म की अनुसार गुरु मंत्रौ का उच्चारण कर एक दूसरे ने जीवन भर साथ निभाना का वादा किया साथ ही नवयुवकों को अंधविश्वास पाखंडवाद से दूर हट कर इस बौद्ध विचारधारा में शादी करने के लिए समाज को संदेश पहुंचा वधू ने बिना मांग में सिंदूर भरते हुए और बिना मंगलसूत्र के अंधविश्वास और पाखंड वाद को दूर करते हुए बौद्ध धर्म के विचारों को व भारत के संविधान को साक्षी मानकर अपनी शादी रचाकर लोगों को संदेश पहुंचा।

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