पोरसा न्यायालय भवन का लोकार्पण न्याय के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचने की प्रतिबद्धता का प्रतीक - न्यायमूर्ति जे के माहेश्वरी
पोरसा न्यायालय भवन का लोकार्पण न्याय के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचने की प्रतिबद्धता का प्रतीक — न्यायमूर्ति जे.के. माहेश्वरी
पोरसा न्यायालय कागजरहित बने, ताकि न्यायालयीन कार्य शीघ्रता से संपन्न हों — न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा
लगभग 10 करोड़ रुपये की लागत से सिविल न्यायालय पोरसा का लोकार्पण
सर्वोच्च न्यायालय के माननीय न्यायमूर्ति श्री जे. के. माहेश्वरी ने कहा है कि पोरसा न्यायालय भवन का लोकार्पण केवल ईंट-पत्थर की एक इमारत नहीं, बल्कि यह न्याय की उस मंशा का प्रतीक है, जो समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचना चाहिए। उन्होंने इसे क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक अवसर बताते हुए कहा कि यह नवीन न्यायालय भवन आमजन के विश्वास का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि न्यायपालिका लोकतंत्र की आधारशिला है और न्याय में विलंब, न्याय से वंचित करने के समान है। उन्होंने कहा कि नवीन न्यायालय भवन का निर्माण न्यायिक प्रक्रिया को गति देने के लिए आवश्यक आधारभूत संरचना उपलब्ध कराता है। इस आधुनिक परिसर से अधिवक्ताओं और न्यायिक कर्मचारियों को बेहतर कार्य वातावरण मिलेगा तथा आम नागरिकों को अपने कानूनी कार्यों के लिए अधिक सुगम और त्वरित सुविधाएँ प्राप्त होंगी। लगभग 10 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित इस भवन की मांग लंबे समय से की जा रही थी, जो आज पूर्ण हुई।
अपने उद्बोधन में उन्होंने कहा कि न्यायपालिका का दायित्व केवल न्याय करना ही नहीं, बल्कि उसे समय पर समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाना भी है। अधिवक्ताओं की भूमिका इसमें अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे समाज और न्यायालय के बीच सेतु का कार्य करते हैं। उन्होंने सभी से कहा कि न्यायालय परिसर की गरिमा बनाए रखते हुए न्याय की शुचिता को सर्वोपरि रखें।
इस अवसर पर मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के माननीय मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री संजीव सचदेवा ने पोरसा न्यायालय को “कागजरहित न्यायालय” बनाने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि इससे न्यायालयीन कार्यवाही अधिक त्वरित एवं पारदर्शी होगी तथा प्रकरणों का शीघ्र निस्तारण संभव हो सकेगा। उन्होंने कहा कि यह भवन बेहतर बुनियादी ढांचे और कार्यक्षमता की मजबूत नींव स्थापित करेगा तथा भविष्य में क्षेत्र की विधिक समस्याओं के समाधान का प्रमुख केंद्र बनेगा।
कार्यक्रम में जस्टिस श्री आनंद पाठक ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए इस पहल को न्यायिक सुदृढ़ीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण बताया।
कार्यक्रम के प्रारंभ में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश मुरैना श्रीमती संगीता मदान ने स्वागत भाषण देते हुए कहा कि इस भवन के निर्माण से न्यायालयीन कार्यों में सुगमता और दक्षता आएगी।
उन्होंने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की।
अंत में पोर्टफोलियो जज न्यायमूर्ति श्री राजेश गुप्ता ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ग्वालियर खंडपीठ के न्यायमूर्ति श्री जी.एस. अहलूवालिया, न्यायमूर्ति श्री मिलिन्द्र रमेश फड़के, न्यायमूर्ति श्री आशीष श्रोति, न्यायमूर्ति श्री अमित सेठ, न्यायमूर्ति श्री आनंद सिंह बहरावत, रजिस्ट्रार जनरल श्री धर्मेन्द्र सिंह, आयुक्त चंबल संभाग श्री सुरेश कुमार, कलेक्टर श्री लोकेश कुमार जांगिड़, पुलिस अधीक्षक श्री समीर सौरभ, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्री कमलेश कुमार भार्गव, अपर कलेक्टर श्री अश्विनी कुमार रावत, अधिवक्ता संघ पोरसा के अध्यक्ष श्री राघवेन्द्र सिंह भदौरिया सहित ग्वालियर एवं मुरैना के न्यायिक अधिकारी एवं अधिवक्ता उपस्थित रहे।
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