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तोफिर गढ़िया में दो दिवसीय कबीर मत सत्संग व भंडारा का भव्य आयोजन- बहा मानवता,प्रेम और ज्ञान की दरिया।

प्रेम, शिक्षा,समानता और नशामुक्ति ही विकसित समाज की आधारशिला — आचार्य राकेश पासवान "शास्त्री"
AIMA मीडिया न्यूज
बिहार,खगड़िया, 26 अप्रैल।

खगड़िया जिला,बेलदौर विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत तेलौछ पंचायत के तोफिर गढ़िया स्थित शिव मंदिर परिसर में दो दिवसीय कबीर मत सत्संग एवं भंडारा का श्रद्धापूर्वक भव्य आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का उद्घाटन शनिवार को देर संध्या जन कल्याण संघ एक आवाज के राष्ट्रीय प्रवक्ता सह जदयू प्रवक्ता आचार्य राकेश पासवान शास्त्री ने विधिवत दीप प्रज्वलित कर किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता संत राम दास साहेब उर्फ रामाकांत पासवान ने की, जबकि मंच संचालन संत उपेन्द्र सिंह साहेब ने प्रभावशाली ढंग से किया।
आयोजन में दूर-दराज से पहुंचे संत-महात्माओं एवं कबीर अनुयाइयों की उपस्थिति ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत कर दिया।
सत्संग में पूर्णिया से पधारे संत महेंद्र बाबा ने संत कबीर के अमर वचनों को ओजपूर्ण प्रवचन और मधुर भजनों के माध्यम से प्रस्तुत किया। उनके विचारों ने उपस्थित जनसमूह को भाव-विभोर कर दिया और पूरा परिसर भक्ति रस में सराबोर हो उठा।
मुख्य अतिथि आचार्य राकेश पासवान शास्त्री ने अपने उद्घाटन संबोधन में कहा कि यह आयोजन केवल धार्मिक परंपरा का निर्वहन नहीं, बल्कि आत्म-जागरण, सामाजिक समरसता और मानवता के उत्थान का सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि संतों का आगमन किसी भी भूमि को पवित्र बना देता है और उनकी वाणी समाज को दिशा देने का कार्य करती है।
जहां साधु-संतों की सेवा सम्मान नहीं होता है वहां नाकारात्मक शक्ति का प्रभाव समाज को गलत दिशा की ओर ले जाता है।
उन्होंने संत कबीर के दोहों का उल्लेख करते हुए कहा कि “माला फेरत जुग भया…” आडंबर छोड़कर आत्मचिंतन का संदेश देता है, वहीं “जाति न पूछो साधु की…” सामाजिक भेदभाव के खिलाफ क्रांतिकारी विचार प्रस्तुत करता है। “ढाई आखर प्रेम का…” के माध्यम से कबीर ने प्रेम को ही सर्वोच्च ज्ञान बताया।
आचार्य शास्त्री ने अपने संबोधन का महत्वपूर्ण हिस्सा युवाओं में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति और शिक्षा पर केंद्रित करते हुए कहा कि “सुखा नशा” समाज के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है, जिससे अपराध और अशिक्षा बढ़ रही है। उन्होंने समाज से आह्वान किया कि नशामुक्ति, शिक्षा और नैतिक मूल्यों को अपनाकर ही एक सभ्य, सुसंस्कृत और विकसित समाज का निर्माण संभव है।
श्री शास्त्री ने अंत में कहा कि सत्संग की वास्तविक सार्थकता तभी है जब हम संतों की शिक्षाओं को अपने जीवन में उतारकर आपसी प्रेम, भाईचारा और सामाजिक एकता को मजबूत बनायें रखेंगे।
कार्यक्रम के दौरान भंडारे का भी आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में साधु-संत जनों और कबीर अनुयाइयों ने महाप्रसाद ग्रहण कर आध्यात्मिक आनंद की अनुभूति प्राप्त की। आयोजन के पहले दिन की सफलता ने रविवार को द्वितीय सत्र में लोगों के बीच विशेष उत्साह देखने को मिला।
इस अवसर पर संतोष साहेब, हड्डी के डाक्टर शम्भू पासवान,अक्षय पासवान, शिक्षक अवधेश कुमार पासवान, सत्यनारायण दास,अभिनंदन पासवान,चन्द्रमणी दास, डॉ करण कुमार,इन्दल, मुकेश मिश्रा,बालो दास, रामसेवक दास, डॉ परमानंद पासवान,बालदेव दास,रंजन, सुरेन्द्र पासवान एवं मुकेश पासवान आदि साधु-संत ,कबीर अनुयाइयी व ग्रामीण प्रबुद्धजन मौजूद रहे।

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