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राजनीति ने कैसे अजय - अभय को एक दूसरे से दूर कर दिया

सत्ता की चाह जब रिश्तों से बड़ी हो जाए, तो इतिहास उसे अच्छी नजर से नहीं देखता। आज बात हरियाणा के उस राजनीतिक परिवार की है, जिसे कभी एकता की मिसाल माना जाता था। जननायक चौधरी देवीलाल का परिवार, जहाँ अजय और अभय चौटाला के बीच गहरा भाईचारा था। लेकिन समय के साथ राजनीति ने ऐसा मोड़ लिया कि यही परिवार दो हिस्सों में बंट गया।

एक दौर था जब अजय चौटाला संगठन संभालते थे और अभय चौटाला मैदान में संघर्ष का चेहरा थे। जब जेबीटी मामले में अजय जेल गए, तब अभय ने परिवार और पार्टी की जिम्मेदारी उठाई। दोनों के बीच ऐसा तालमेल था कि लोग उन्हें राम-लक्ष्मण की जोड़ी कहते थे। लेकिन धीरे-धीरे हालात बदले और मतभेद बढ़ने लगे।

साल 2018 की गोहाना रैली के बाद हालात खुलकर सामने आ गए। नई पीढ़ी के रूप में दुष्यंत चौटाला के आगे आने से परिवार के अंदर खींचतान बढ़ी। अनुशासन और नेतृत्व को लेकर विवाद गहरा गया। ओमप्रकाश चौटाला ने सख्त फैसला लेते हुए अपने ही पौत्रों को पार्टी से निकाल दिया। उस समय अजय चौटाला के सामने कठिन स्थिति थी—एक तरफ भाई, दूसरी तरफ बेटे। उन्होंने अपने बेटों के साथ खड़े होने का फैसला किया।

इसके बाद अलग रास्ता चुना गया और जननायक जनता पार्टी बनी। पुरानी पार्टी इंडियन नेशनल लोक दल दो भागों में बंट गई। जो परिवार कभी एक साथ खड़ा था, अब अलग-अलग राजनीतिक मंचों पर नजर आने लगा।

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