✍️✍️वो कॉलेज का ज़माना✍️✍️
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क्या खूब था वो कॉलेज का ज़माना
मासूम-सी शरारतें करके मुस्कुराना
बात-बात पर रूठना फिर मनाना
देकर गुलाबी गुलाब फिर प्यार जताना
करके सिरफिरी बातें ठहाके लगाना
सर्दी के दिनों में धूप में खड़े होकर
खेल के मैदान में चिलगोजे़ खाना
कभी कैण्टीन तो कभी ठेले पर खाना-खिलाना
चुराकर टिफिन एक-दूसरे का फिर
सारा का सारा खाना चट कर जाना
क्लास में तुम्हारे साथ सज़ा मैंने भी पाना
नाराज़गी पर चिट्ठियां लिखकर भिजवाना
इन हरकतों पर फिर घर में डांट खाना
बिल्कुल तुम्हारी तरह मुझे अब तक याद है
क्या खूब था वो कॉलेज का ज़माना।
*गीता सरीन*
मेरठ कैण्ट (उ.प्र.)