मिड डे मील वर्कर को फरवरी से नहीं मिल रहा है वेतन : उर्मिला रावत
संगडाह नोहराधार जिला सिरमौर के अति दुर्गम क्षेत्र राजकीय प्राथमिक पाठशाला सागंना में कार्यरत मिड डे मील वर्कर उर्मिला रावत ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि सरकारी स्कूलों में कार्यरत सभी मिड डे मील वर्कर को फरवरी से आज तक कोई भी वेतन नहीं मिला है जिसकी वजह से सभी मिड डे मील वर्कर को अपने परिवार का पालन पोषण करना बहुत कठिन हो रहा है उर्मिला रावत ने बताया कि मिड डे मील वर्कर को वेतन के रूप में सिर्फ पाच हजार रुपए मिलते हैं वह भी समय पर नहीं मिल रहे हैं जिससे सभी मिड डे मील वर्कर अपने आप को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं मिड डे मील वर्कर उर्मिला रावत ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार एवं प्रदेश की सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार से मांग करते हुए कहा है कि बढ़ती महंगाई को ध्यान में रखते हुए मिड डे मील वर्कर का वेतन कम से कम 15 हजार रुपए होना चाहिए ताकि वह भी अपने परिवार का पालन पोषण आसानी से कर सके उन्होंने बताया कि मिड डे मील वर्कर भी सुबह 10 बजे से 2 बजे तक सरकारी स्कूलों में अपनी सेवाएं देते हैं लेकिन उनको सिर्फ पाच हजार रुपए ही वेतन मिलता है जबकि स्कूल में कार्यरत अध्यापक को लाखों रुपए का वेतन मिलता है केंद्र व राज्य सरकार को इस पर गंभीर विचार करना चाहिए मिड डे मील वर्कर भी सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की सेवा करते हैं इसलिए उनके वेतन में भी कम से कम 15 हजार रुपए की बढ़ोतरी होनी चाहिए और उन्हें भी अन्य कर्मचारियों की तरह छुट्टियों का भी वेतन मिले और समय पर मिले।