logo
Select Language
Hindi
Bengali
Tamil
Telugu
Marathi
Gujarati
Kannada
Malayalam
Punjabi
Urdu
Oriya

आंसुओं से भीगी तहसील की चौखट -: _लाठी टेककर हक मांगती धनवन्ती देवी: कागज मेरे, पर जमीन पर दूसरों का कब्जा_

आंसुओं से भीगी तहसील की चौखट -:
_लाठी टेककर हक मांगती धनवन्ती देवी: कागज मेरे, पर जमीन पर दूसरों का कब्जा_

चंदौली। बुढ़ापे की लाठी और आंखों में आंसू लिए धनवन्ती देवी जब तहसील की चौखट पर पहुंचती हैं, तो हर सीढ़ी उनसे सवाल करती है — आखिर मेरा कसूर क्या है?

चकिया के अम्मर डहिया गांव की इस बुजुर्ग विधवा का दर्द गहरा है। पति श्याम लाल ने दूसरी शादी कर ली, और आरोप है कि नई पत्नी ने धनवन्ती के हिस्से की 15 बिस्वा जमीन छीन ली। विरोध किया तो मार भी खाई।

अब वो कांपते हाथों में कागज थामे तहसील के चक्कर काट रही हैं। हर पेशी पर उम्मीद बंधती है, हर तारीख पर उम्मीद टूटती है। चप्पलें घिस गईं, आवाज बैठ गई, पर इंसाफ की राह अब भी कोसों दूर है।

लाठी के सहारे खड़ी ये मां पूछ रही है — क्या इस उम्र में भी हक मांगना गुनाह है? क्या तहसील की चौखट पर सिर्फ तारीखें मिलेंगी, इंसाफ नही।

0
0 views

Comment