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खाड़ी में 89 लाख भारतीयों की सुरक्षा पर सवाल — RTI में सरकार का चौंकाने वाला जवाब

28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इज़रायल द्वारा ईरान पर किए गए संयुक्त हमले के बाद पूरे पश्चिम एशिया में तनाव का माहौल बना हुआ है। इस अस्थिर स्थिति के बीच खाड़ी देशों में काम कर रहे लाखों भारतीयों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता सामने आई है।

इसी मुद्दे पर जानकारी हासिल करने के लिए सूचना के अधिकार (RTI) के तहत एक आवेदन दायर किया गया। यह आवेदन छत्तीसगढ़ कांग्रेस के RTI विभाग के अध्यक्ष नितिन राजी सिन्हा द्वारा प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजा गया था, जिसमें पूछा गया था कि संकट की स्थिति में प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा के लिए सरकार ने क्या कदम उठाए हैं।

लंबी प्रक्रिया के बाद विदेश मंत्रालय से मिले जवाब ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। मंत्रालय के खाड़ी प्रभाग के CPIO अनुराग नगर ने लिखित में बताया कि इस संबंध में मांगी गई जानकारी उनके रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि मंत्रालय अपने दूतावासों और मिशनों के जरिए विदेशों में रह रहे भारतीयों के कल्याण के लिए लगातार प्रयास करता रहता है।

इस जवाब के बाद अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या सरकार ने वास्तव में कोई ठोस योजना नहीं बनाई, या फिर जानकारी को सार्वजनिक नहीं किया जा रहा है।

वहीं, कुवैत में काम कर रहे गुरजिंदर नाम के एक भारतीय ने आरोप लगाया कि संकट के समय दूतावास की ओर से उनसे किसी प्रकार का संपर्क नहीं किया गया। उनके जैसे कई अन्य प्रवासियों ने भी दावा किया कि उन्हें अपनी सुरक्षा के लिए खुद ही इंतजाम करने पड़े।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, खाड़ी के छह देशों में करीब 89 लाख भारतीय प्रवासी रहते हैं, जिनमें बड़ी संख्या श्रमिक वर्ग की है। इतनी बड़ी आबादी के बावजूद संकट के समय किसी औपचारिक संपर्क की कमी ने लोगों की चिंता और बढ़ा दी है।

इस मामले में अधिक स्पष्टता के लिए विदेश मंत्रालय को ईमेल के जरिए सवाल भेजे गए हैं, लेकिन खबर लिखे जाने तक मंत्रालय की ओर से कोई जवाब नहीं मिला है।

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