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“रोस्टिंग के नाम पर मनमानी कटौती से जनता परेशान” क्या पूरे साल सिर्फ वसूली होगी, व्यवस्था पर ध्यान कब?

गदागंज (रायबरेली) में बिजली कटौती से बिगड़े हालात — “रोस्टिंग” के नाम पर जनता परेशान, मच्छरों का कहर अलग

गदागंज, रायबरेली — इलाके में लगातार बिजली कटौती ने लोगों की जिंदगी अस्त-व्यस्त कर दी है। “रोस्टिंग” के नाम पर घंटों बिजली गुल की जा रही है, लेकिन न कोई तय समय है, न कोई सूचना। भीषण गर्मी में जब बिजली सबसे ज्यादा जरूरी होती है, उसी समय सप्लाई बंद कर दी जाती है।
सबसे गंभीर बात यह है कि अब हालात ऐसे हो गए हैं कि सुबह और शाम में भी सिर्फ चंद घंटों के लिए ही बिजली मिल पा रही है, बाकी समय पूरा इलाका अंधेरे और गर्मी में डूबा रहता है।
सबसे बड़ी समस्या यह है कि बिजली कटते ही हालात और खराब हो जाते हैं। पंखे और कूलर बंद पड़ जाते हैं, और मच्छरों का आतंक बढ़ जाता है। लोग रातभर सो नहीं पा रहे—एक तरफ उमस भरी गर्मी, दूसरी तरफ मच्छरों के काटने से नींद पूरी तरह छिन गई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कई-कई घंटे तक बिजली नहीं आती, जिससे घरों में रहना मुश्किल हो गया है। छोटे बच्चे, बुजुर्ग और बीमार लोग सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। छात्रों की पढ़ाई बाधित हो रही है।
लोगों का आरोप है कि बिजली विभाग हर बार “रोस्टिंग” का बहाना बनाकर जिम्मेदारी से बच रहा है। न कोई शेड्यूल जारी किया जाता है और न ही शिकायतों पर सुनवाई होती है।

मुख्य सवाल जिम्मेदारों से:

रोस्टिंग के नाम पर घंटों बिजली काटना कब तक चलेगा?

मच्छरों और बीमारियों का खतरा बढ़ने की जिम्मेदारी कौन लेगा?

क्या सरकार और मंत्री पूरे साल सिर्फ वसूली में व्यस्त रहते हैं, व्यवस्था सुधार पर ध्यान क्यों नहीं दिखता?

गदागंज की जनता बिजली कटौती से त्रस्त है। “रोस्टिंग” के नाम पर हो रही यह मनमानी अब बर्दाश्त के बाहर है। प्रशासन और बिजली विभाग को तुरंत व्यवस्था सुधारनी होगी, ताकि लोगों को राहत मिल सके।

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