भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी स्वास्थ्य सेवाएँ: कुंडा में एम्बुलेंस कर्मियों ने बुझाया A C, मरीज की जान से खिलवाड़
भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी स्वास्थ्य सेवाएँ: कुंडा में एम्बुलेंस कर्मियों ने बुझाया A C, मरीज की जान से खिलवाड़
प्रतापगढ़ (कुंडा): उत्तर प्रदेश सरकार की बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के दावों की पोल उस समय खुल गई, जब कुंडा में एक गंभीर मरीज को ले जा रही सरकारी एम्बुलेंस (108) के कर्मचारियों ने भीषण गर्मी में A C चलाने से साफ इनकार कर दिया। मामला और भी गंभीर तब हो गया जब कर्मचारियों ने इसके पीछे का तर्क 'डीजल की बचत' बताया।
क्या है पूरा मामला?
शुक्रवार को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) कुंडा में एक व्यक्ति अपने पिता को गंभीर हालत में इलाज के लिए लेकर आए। डॉक्टरों ने मरीज की नाजुक स्थिति को देखते हुए उन्हें तत्काल प्रयागराज रेफर कर दिया। मरीज के परिजनों ने सरकारी सहायता के लिए 108 एम्बुलेंस (वाहन संख्या: UP 32 FG 2099) बुलाई।
बाहर का पारा आसमान छू रहा था, ऐसे में जब मरीज के पुत्र ने एम्बुलेंस चालक और परिचालक से A C चलाने का अनुरोध किया, तो मानवता को शर्मसार करने वाला जवाब मिला। कर्मियों ने दो टूक कहा— "A C नहीं चलेगा, क्योंकि इससे गाड़ी डीजल ज्यादा खाती है।"
डिप्टी सीएम के दफ्तर से मिला टका सा जवाब
हैरानी की बात यह है कि जब इस मामले की शिकायत उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री बृजेश पाठक के कार्यालय के लैंडलाइन नंबर (0522-2238088) पर की गई, तो वहां से भी निराशा ही हाथ लगी। शिकायतकर्ता के अनुसार, वहां से जवाब मिला कि— "एम्बुलेंस प्राइवेट (आउटसोर्स) है, हम इसमें क्या कर सकते हैं?" यह जवाब उन सरकारी दावों पर बड़ा सवाल खड़ा करता है जिनमें 'शून्य लापरवाही' की बात कही जाती है।
आम जनता के साथ बदसलूकी
मरीज के परिजनों का आरोप है कि परिचालक ने न केवल सुविधा देने से मना किया, बल्कि उनके साथ अभद्र व्यवहार और बदतमीजी भी की। यह स्थिति तब है जब एक पत्रकार के पिता खुद इस स्थिति का शिकार हुए। ऐसे में सवाल उठता है कि अगर रसूख रखने वाले लोगों के साथ ऐसा व्यवहार हो रहा है, तो बेसहारा और गरीब आम जनता का क्या होता होगा?
मुख्य बिंदु:
डीजल चोरी का संदेह: एम्बुलेंस में A C न चलाकर डीजल बचाने की कोशिश सीधे तौर पर भ्रष्टाचार और चोरी की ओर इशारा करती है।
संवेदनहीनता: गंभीर मरीज की जान जोखिम में डालकर कर्मचारी अपनी मनमानी कर रहे हैं।
सिस्टम फेलियर: सरकारी योजनाओं का लाभ धरातल पर मिलने के बजाय भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रहा है।
स्थानीय निवासियों और पीड़ित परिवार ने प्रशासन से मांग की है कि उक्त वाहन के चालक और परिचालक पर सख्त कार्रवाई की जाए और जिले में संचालित सभी एम्बुलेंसों की जांच हो ताकि डीजल चोरी के इस खेल का पर्दाफाश हो सके।